Ajay Award – 2025 शिक्षा नहीं, संस्कारों की रोशनी में चमका चित्रकूट

Ajay Award – 2025: शिक्षा नहीं, संस्कारों की रोशनी में चमका चित्रकूट
चित्रकूट, 21 जुलाई।
चित्रकूट की शांत पहाड़ियों के बीच सोमवार का दिन शिक्षा के उजास और प्रतिभाओं की मुस्कान से सराबोर रहा। अवसर था – Ajay Award – 2025 प्रतिभा सम्मान समारोह का, जिसे सुषमा स्वरूप इंटरनेशनल स्कूल ने गरिमा और संवेदना के साथ आयोजित किया।
इस गौरवपूर्ण आयोजन में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे नीति-शिक्षा के मर्मज्ञ सचिन चतुर्वेदी ने मंच से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “यह सम्मान केवल ट्रॉफियों का नहीं, आत्मसम्मान का उत्सव है। जब कोई बच्चा खुद पर गर्व करना सीखता है, तभी वह जीवन में अपना ‘Ikigai’ – यानी जीवन का उद्देश्य – पहचानता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों की आंखों में झांकते उत्साह को, गुरुजनों के चेहरे पर दिखते गर्व को और आयोजन की एक-एक परत में रची-बसी गरिमा को विशेष रूप से रेखांकित किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे डॉ. शिशिर पांडेय (माननीय कुलपति, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय), जिनकी विद्वता और सरलता ने मंच को अतिरिक्त गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की चेयरपर्सन रचना अग्रवाल ने की। आयोजन के मूल प्रेरक संस्थापक व प्रबंध निदेशक अजय कुमार अग्रवाल ने बच्चों के सर्वांगीण विकास को ही विद्यालय की प्राथमिकता बताया।

प्राचार्या अपर्णा पांडेय और कोऑर्डिनेटर केशव शिवहरे की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को सुगठित और संवेदनशील बनाया।
इस विशेष आयोजन की एक अद्वितीय बात यह रही कि यहां सम्मानित अधिकतर विद्यार्थी वे थे, जो गांवों से आते हैं – जहां अभी भी शिक्षा के संसाधन सीमित हैं, लेकिन सपने अनंत हैं।
इस विद्यालय ने न केवल शिक्षा को घर-आंगन तक पहुंचाया है, बल्कि संस्कारों से सींचकर प्रतिभाओं को आकार भी दिया है।
यह आयोजन एक संदेश बनकर उभरा –
“जहां बच्चों की आंखों में उद्देश्य हो, वहां विद्यालय मात्र इमारत नहीं, एक निर्माण स्थल बन जाता है – व्यक्तित्व निर्माण का।”
Ajay Award – 2025 सिर्फ एक पुरस्कार समारोह नहीं था, यह ग्रामीण प्रतिभाओं के सम्मान का, नई पीढ़ी की आकांक्षाओं के उद्घोष का और शिक्षा में मूल्यों के पुनर्स्थापन का सशक्त उदाहरण था। जब मंच से ‘Ikigai’ जैसे गूढ़ जापानी जीवन-दर्शन को बच्चों से साझा किया गया, तो यह स्पष्ट हो गया कि यह विद्यालय महज नंबरों की दौड़ नहीं, बल्कि जीवन की राह दिखा रहा है।
चित्रकूट जैसे क्षेत्र में जब शिक्षा प्रेरणा बन जाए, तो यकीन मानिए, भारत की आत्मा फिर से उजली होने लगती है।