दूसरे बागेश्वर बाबा की गूंज चित्रकूट के पंडित अजय उपाध्याय छत्तीसगढ मे लगाते हैं दिव्य दरबार

दूसरे बागेश्वर बाबा की गूंज चित्रकूट के पंडित अजय उपाध्याय छत्तीसगढ मे लगाते हैं दिव्य दरबार
आस्था का भारतीय भूगोल बड़ा विराट है। यहाँ हर शिला, हर नदी, हर वृक्ष में देवत्व का स्पर्श देखा जाता है। यही कारण है कि समय-समय पर साधक और संत समाज के बीच आशा की किरण बनकर प्रकट होते रहे हैं। हाल ही में चित्रकूट की तपोभूमि से जुड़े एक युवा आचार्य ने देशभर में चर्चा का केंद्र बना दिया है।
पंडित अजय उपाध्याय, जिनका जन्म चित्रकूट की पावन धरती पर हुआ, आज छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले के पडेरवा पहाड़ स्थित हनुमान मंदिर में दिव्य दरबार लगाकर श्रद्धालुओं के जीवन की अनकही कहानियों को उद्घाटित कर रहे हैं। उनका दावा है कि वे भूत, भविष्य और वर्तमान की सटीक जानकारी श्रद्धालुओं को देते हैं। आश्चर्यजनक यह कि उनकी वाणी में लोगों को ऐसा विश्वास दिखाई देता है जिसे नकार पाना कठिन हो जाता है।

अजय उपाध्याय की साधना का आधार केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं है। वे संतोषी माता के परम भक्त हैं और साथ ही साथ हनुमान जी की उपासना में रमे रहते हैं। उनके व्यक्तित्व में भक्ति और ज्ञान का ऐसा संगम है मानो जानकी और हनुमान एक साथ कलियुग में उतर आए हों। यही कारण है कि लोग उन्हें “दूसरे बागेश्वर बाबा” की संज्ञा देने लगे हैं।
यह उल्लेखनीय है कि उनकी इस परंपरा की जड़ें गहरी हैं। उनके पिता देवा उपाध्याय पिछले तीन दशकों से मौखिक रूप में लोगों का भूत-भविष्य बताते आए हैं। इस निरंतरता ने परिवार की वाणी में समाज का अटूट विश्वास स्थापित किया है।

हाल ही में चित्रकूट यात्रा के दौरान पंडित अजय उपाध्याय ने कैमरे पर खुलकर भविष्यवाणी की। यह वीडियो यूट्यूब के फुलस्टॉप डिजिटल चैनल पर प्रकाशित हुआ और देखते ही देखते वायरल हो गया। अब तक 42 हज़ार से अधिक दर्शक इसे देख चुके हैं और देश-विदेश से प्रतिक्रिया का सिलसिला लगातार जारी है। यह न केवल आस्था का प्रमाण है बल्कि आधुनिक संचार माध्यमों में संत परंपरा की स्वीकृति का भी सशक्त उदाहरण है।
प्रश्न यह नहीं है कि भविष्यवाणी कितनी सटीक है या नहीं, बल्कि यह है कि भारतीय समाज की आत्मा आज भी अपने संतों और साधकों में उत्तर खोजती है। विज्ञान और तकनीक की उपलब्धियों के बावजूद जब कोई साधक आस्था का दीपक जलाता है तो लोग उसके चारों ओर एकत्रित हो जाते हैं। यही भारत की आध्यात्मिक धरोहर की पहचान है।
अजय उपाध्याय का उभार इस बात का द्योतक है कि धर्म और अध्यात्म आज भी लोकमानस की धड़कन बने हुए हैं। भले ही उन्हें दूसरे बागेश्वर बाबा की उपाधि दी जा रही हो, परंतु यह न भूलना चाहिए कि हर साधक अपनी साधना और सेवा से नया अध्याय रचता है।
सवाल यही है कि यह दिव्य परंपरा समय की कसौटी पर कितनी स्थायी सिद्ध होगी। लेकिन इतना तय है कि चित्रकूट की यह संत परंपरा छत्तीसगढ़ की धरती पर नई गूंज पैदा कर चुकी है और इसकी प्रतिध्वनि दूर-दूर तक सुनाई दे रही है।