हीरा सिर्फ पन्ना मे नही मिलता महोबा मे भी मिलता है देखिए मुलाकात

मुलाकात एक अच्छा प्रोग्राम है। सत्ताइस के चुनाव से पहले मुलाकात होने से जो मंथन होगा उससे ही विष और अमृत निकलकर आएगा , इससे पहले परिणाम तय करने वाला खजाना हाथ लग जाना भी महत्वपूर्ण है।
अबकी बार शुरूआत महोबा से हुई वह भी ईश्वरीय कृपा से हुई है। माँ चंडिका की कृपा से अचानक Aalok Sharma Abhay अग्रज बोले कि बस तुम चले आओ। और फिर क्या ?
मैं माँ की इच्छा महसूस कर निकल पड़ा तो महोबा मे हुई मुलाकात मुझे मानसिक सुकून दे गई। एक सकारात्मक दिव्य ऊर्जा महसूस होना यात्रा की सफलता की सूचक होती है।

महोबा मे Sulabh Saxena जी से मुलाकात हुई और साक्षात्कार का मंथन हुआ। जिससे पता लगा कि हीरा सिर्फ पन्ना मे नही मिलता बल्कि हीरा महोबा मे भी है , आपका संघर्ष और व्यक्तित्व जानकर लगा कि सफलता के लिए समर्पण ऐसा ही होना चाहिए।
आपके व्यक्तित्व मे गंभीरता का जैसा अंश महसूस हुआ उससे कहा जा सकता है कि जो लोग भी राजनीति करना चाहते हैं उनमे यह गुण होना चाहिए। धैर्य से मंजिल अवश्य मिलती है तो एक ऐसा ही धैर्य का तत्व आपके व्यक्तित्व मे महसूस हुआ।
राजनैतिक यात्रा जैसा शब्द जब अनायास निकला तो विचार आया कि महादेव के डमरू से निकला हुआ यह नाम राजनीति मे नैतिकता स्थापित करने के लिए है , नीति ऐसी जिसकी नियत अच्छी हो और राज ऐसा जिसमे नैतिकता हो।
घमंडी नेतृत्व से मुक्त होने के लिए सबसे मुलाकात जरूरी है , राजनैतिक यात्रा की प्रत्येक मुलाकात दिलचस्प होगी और सारगर्भित साक्षात्कार निकलकर सामने आएंगे।
महोबा के युवा नेता और समाजसेवी व्यक्तित्व के धनी सुलभ जी से हुई मुलाकात राजनैतिक यात्रा की नींव बनी जो आगे देश – प्रदेश और क्षेत्र व समाज मे अच्छा माहौल वाला मानसिक महल तैयार करेगा जिसमे सबको जिंदगी जीना सुखमय लगेगा।
आपका लेखक पत्रकार सौरभ