खिचड़ी की थाली से निकला जनसंवाद कर्वी में ‘स्कूल चलो अभियान’ को नई धार

चित्रकूट |
जनपद चित्रकूट की कर्वी विधानसभा के नगर कर्वी स्थित चितरा गोकुलपुर वार्ड संख्या-1 में एक अलग तरह की राजनीति का दृश्य देखने को मिला , जहां भाषणों की जगह बच्चों के साथ बैठकर खिचड़ी खाने का संदेश ज्यादा असरदार साबित हुआ।
भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे ग्राम-बस्ती सम्पर्क अभियान के दौरान जिलाध्यक्ष महेन्द्र कोटार्य ने प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालय पहुंचकर नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया।
यह महज एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि एक प्रतीकात्मक पहल थी। सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखने और समाज को विश्वास दिलाने की। मिड-डे मील योजना के अंतर्गत बच्चों को परोसी जा रही तहरी का स्वाद लेकर उन्होंने न केवल भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और व्यवस्था का निरीक्षण किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने का वास्तविक माध्यम बन रही हैं।

सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब विद्यालय की रसोइया बहनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। अक्सर व्यवस्था के सबसे अहम लेकिन अनदेखे किरदार रसोइयों को सार्वजनिक मंच पर सम्मान देना एक मानवीय और प्रेरक कदम है। यह उस ‘अदृश्य श्रम’ की स्वीकृति है, जो बच्चों के पोषण और शिक्षा के बीच पुल का काम करता है।
इस पूरे आयोजन ने एक व्यापक सामाजिक संदेश भी दिया कि शिक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता का विषय है। जिलाध्यक्ष महेन्द्र कोटार्य का अभिभावकों से यह आग्रह कि वे अपने बच्चों का अधिक से अधिक नामांकन सरकारी विद्यालयों में कराएं, सीधे तौर पर उस विश्वास को पुनर्स्थापित करने की कोशिश है जो समय के साथ कमजोर पड़ा था।

राजनीति के पारंपरिक ढांचे से इतर यह पहल ‘जनसरोकार की राजनीति’ का संकेत देती है। जहां नेता मंच से नहीं, जमीन से संवाद करता है। बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जिसमें जनप्रतिनिधि खुद को जनता के बीच, उनके जीवन के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करता है।

चित्रकूट की इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब राजनीति संवेदनशीलता के साथ जुड़ती है, तो वह केवल सत्ता का साधन नहीं रहती, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन जाती है। यह एक ऐसा सूर्योदय है, जो संकेत देता है कि विकास की रोशनी अब गांव – गांव , स्कूल – स्कूल तक पहुंच रही है।