लखनऊ कोचिंग सेंटर हादसा केवल कानूनी फेलियर नही सोशल फेलियर भी है

अगर हम मे मानवता है तो सोचिए कि सिस्टम की चूक ने असहनीय दुखद सत्य से जन जन का सामना कराया है कि विकास के मीटर की तेज रफ्तार मे जीवन और भविष्य का गला घोटने वाली व्यवस्था मे जी रहे हैं।

लखनऊ मे बच्चों की मौत ने मुझे तन्हा कर दिया है ; मैं गहरी उदासी की काली रात मे घिरा हूँ। यह कितना दुखद है कि हम खुली आंखो से भारत के भविष्य को जलता हुआ देखने को मजबूर हुए। यह केवल कानूनी फेलियर नही बल्कि सामाजिक फेलियर भी है , हम सिक्के के दोनो पहलुओं से हारे हैं।

शासन हो या प्रशासन और समाज तीनों को एकजुट होकर सोचने की जरूरत है। चूक हर ओर से हो रही है तभी समय-समय पर देश के कोने कोने से ऐसी खबरें आ जाती हैं।

इस बार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे हुई है ; हाँ ये वही लखनऊ है जहाँ का प्रेरक वाक्य यही है कि ” मुस्कुराइए कि आप लखनऊ मे हैं। ” लेकिन अब सवाल यह है कि क्या मुस्कुराया जा सकता है ?

अगर हम मे मानवता है तो सोचिए कि सिस्टम की चूक ने असहनीय दुखद सत्य से जन जन का सामना कराया है कि विकास के मीटर की तेज रफ्तार मे जीवन और भविष्य का गला घोटने वाली व्यवस्था मे जी रहे हैं।

ऐसी घटना के उपरांत सामाजिक नेताओं को चिंतन – चेतना और जागरण का अभियान तेज करना चाहिए। जन जन मे संवेदनशीलता की परख करनी चाहिए और ईमानदार संवेदनशील नागरिक व शासन और प्रशासन का निर्माण करने मे भागीदार बनना चाहिए , यही समय की मांग है।

अजय गुप्ता
प्रदेश उपाध्यक्ष एलजेपी