पर्चा वाले बाबा अजय महाराज की जन्मभूमि में बनेगा मंदिर, पहाड़ी बुजुर्ग में भी लगेगा दिव्य दरबार

अजय महाराज की जन्मभूमि पहाड़ी बुजुर्ग में स्थित उनके पुराने कच्चे घर के खंडहर में बदल जाने की खबर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। इसके बाद अजय महाराज ने कहा कि अब यहां दोबारा घर नहीं बनाया जाएगा, बल्कि मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।

चित्रकूट। छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले के पेंडरवा पहाड़ स्थित सिद्ध हनुमान मंदिर में नियमित रूप से लग रहे दिव्य दरबार को लेकर चर्चित अजय उपाध्याय महाराज अब अपनी जन्मभूमि चित्रकूट के पहाड़ी बुजुर्ग गांव में भी मंदिर निर्माण और भविष्य में दिव्य दरबार लगाने की घोषणा कर चुके हैं। अजय महाराज की जन्मभूमि का कच्चा मकान आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। यह स्थिति उनके शुरुआती जीवन में रहे अभाव और संघर्ष की तस्वीर भी सामने रखती है।

पेंडरवा पहाड़ स्थित सिद्ध हनुमान मंदिर में लगने वाले दरबार के चलते अजय महाराज की पहचान तेजी से बढ़ी है। उनके अनुयायी उन्हें ‘पर्चा वाले बाबा’ के नाम से भी जानते हैं। भक्तों का दावा है कि दरबार में उन्हें अपनी समस्याओं से संबंधित सटीक जानकारी मिलती है और तंत्र-बाधा सहित अन्य परेशानियों से मुक्ति मिलने तथा कार्यों के सफल होने की उम्मीद लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

खंडहर मकान की खबर के बाद लिया बड़ा संकल्प

अजय महाराज की जन्मभूमि पहाड़ी बुजुर्ग में स्थित उनके पुराने कच्चे घर के खंडहर में बदल जाने की खबर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। इसके बाद अजय महाराज ने कहा कि अब यहां दोबारा घर नहीं बनाया जाएगा, बल्कि मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में उनकी जन्मभूमि पहाड़ी बुजुर्ग में भी दिव्य दरबार लगाया जाएगा। इस घोषणा के बाद स्थानीय लोगों और उनके अनुयायियों में उत्साह का माहौल है।

मंदिर निर्माण में सहयोग की इच्छा जता रहे भक्त

जन्मभूमि में मंदिर और दिव्य दरबार की घोषणा के बाद अजय महाराज के अनुयायी मंदिर निर्माण में सहयोग की इच्छा जाहिर करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जन्मभूमि पर मंदिर बनने से पहाड़ी बुजुर्ग गांव की पहचान भी व्यापक स्तर पर सामने आएगी और यहां दूर-दराज से श्रद्धालुओं के आने की संभावना बढ़ेगी।

अजय महाराज की जन्मभूमि से जुड़ी यह कहानी उनके संघर्षपूर्ण शुरुआती जीवन से लेकर वर्तमान धार्मिक पहचान तक के सफर को भी सामने रखती है। अब देखना होगा कि पहाड़ी बुजुर्ग में प्रस्तावित मंदिर का निर्माण कब शुरू होता है और भविष्य में यहां दिव्य दरबार किस स्वरूप में आयोजित किया जाता है।