सुर्ख़ियों मे रामायण मेला कथित अपमान का सत्य क्या है ?

चित्रकूट
संत तुलसीदास ने लिखा था कि ढोल गंवार शूद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी तो आज यह अक्सर चरितार्थ होता नजर आता है , हालांकि ताड़ना का मतलब नजर रखना भी कहा गया है परन्तु इसका सीधा सा भाव मार पीट और अपमान से जोड़कर देखा जाता रहा है।
पिछले दिनों रामायण मेला के मंच पर कुछ इस तरह का अपमान हुआ जिसकी चर्चा हो रही है तो मैंने सोचा क्यों ना आयोजकों के कान खोल दिए जाएं।
अब देखिए कि दीप प्रज्वलन की फोटो मे एक भी नारी नजर आ रही है क्या ? अगर आपको किसी को दिख जाए तो प्रसंग लिखने वाले को एक थप्पड़ खींच कर मार सकते हैं और अगर नही दिख रही है तो आयोजकों से पूछिए कि जब वहाँ नारी शक्ति मौजूद थी तो आखिर क्यों उनको दीप प्रज्वलन से दूर रखा गया ?

आपको तस्वीर मे भाजपा मध्यप्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष नंदिता पाठक , जय बजरंग सेना की राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय और कथित रूप से चर्चित जज साहब की पत्नी भी नजर आ जाएंगी किन्तु जिनको अतिथि रूप मे आमंत्रित किया गया उनको दीप प्रज्वलन कार्यक्रम से वंचित रखा गया !

अब देखिए कामदगिरि पीठ के संचालक संत मदनगोपाल दास जी महाराज का चेहरा क्यों तमतमाया हुआ है ? ये पहले की कुछ तस्वीर मे प्रसन्न मुद्रा मे नजर आते हैं किन्तु अचानक इनके अंदर का दुर्वासा ऋषि चेहरे पर जागृत हुआ तो क्यों ? असल मे जज साहब को संत की बराबरी मे बैठा दिया गया।
कामतानाथ जैसे धाम के प्रतिष्ठित संत की बराबरी मे जज साहब को बैठाकर आयोजक मंडल क्या साबित करना चाहता है ? यहाँ इनको यह ध्यान रखने की आवश्यकता थी कि संत को उच्च सिंहासन मे स्थान देना चाहिए था।
इस दौरान एक किताब का विमोचन हुआ जिस दौरान भी उपस्थित नारी शक्ति को अंतर्मन मे अपमान का दंश झेलना पड़ा , नारी शक्ति ताकती रही कि आखिर हर कार्यक्रम से दूर क्यों रखा जा रहा है तो इस बीच एक स्वर गूंजा कि ऐसा ही करना था तो बुलाया क्यों ?
कुलमिलाकर सूत्र यही बताते हैं कि जाने या अनजाने मे आयोजकों से बहुत बड़ी गलती हुई है और ऐसा इसलिए हुआ कि इस मेला मे होने वाली गलतियाँ कभी भी जनता के सामने चर्चा का विषय नही बनने पायीं अन्यथा पर्यटन विभाग हो या समिति के आयोजक सबको अंततः गलती का अहसास होता है किन्तु यह आयोजन धर्म के साख की आड़ मे हर साल यूं ही संपन्न हो जाता है।