कामसूत्र संभोग शरीर धर्म की भूख प्यास और जीवन ऊर्जा

कमजोर हो जाते हैं ? तत्काल ऐसा हो जाता है कि संभोग की कल्पना बस हो जाए तो युवा अवस्था मे स्थिरता नही है , यह स्थिरता किसी भी उम्र मे नही है। और आज मोबाईल के दौर मे यह कमी बढ़ती जा रही है।
वास्तव मे संभोग शरीर धर्म का आवश्यक भूख है और प्यास है। संभोग पाप है कि पुण्य इसका निर्णय बाद मे करना , सबसे पहले विचार भूख और प्यास पर करो।
जैसे देह के पोषण के लिए भूख प्यास मिटाते हैं और स्वस्थ रहने के लिए शौच क्रिया आदि करते हैं वैसे ही सेक्स बहुत महत्वपूर्ण पहलू है , इसका दमन करने मे सफलता नही है। इसलिए दमन के लिए तो बिलकुल नही सोचना।
स्त्रियाँ कितनी भावुक होती हैं , सचमुच भावनात्मक पहलू मे जितना आकर्षण है उतना देह की खूबसूरती का आकर्षण स्थिर नही है। देह ढलना तय है किन्तु मन की उम्र नही ढलती वह वाणी से भावनात्मक रूप से हर पहर मे बच्चा – बुजुर्ग और युवा कभी भी हो सकता है। जो कभी समझदारी की बात कहेगा और कभी तो अत्यंत प्रेम का प्यासा हो जाएगा , वह अचानक से आलिंगन मे आना चाहता है और इसके लिए तलाश होती है एक कोमल हृदय वाले भावनात्मक साथी की !
इसलिए संभोग बहुत मानसिक है जो देह को धुरी तो मानता है किन्तु मानसिक रूप से वह सुख चाहता है। चरमसुख बेहद मानसिक है , लगाव मे है और मखमली कोमल स्पर्श मे है। जो किसी एडल्ट मूवी जैसे बिल्कुल नही है कि हिंसा के जैसे दर्द देता हुआ सेक्स दिखाया जाए , नही बिल्कुल नही !
अत्यंत मखमली स्पर्श जिससे दिव्य ऊर्जा का अहसास हो जिसमे स्त्री और पुरुष दोनो मे स्थिरता हो और वह बहुत सहज तरीके से लिपट सकें , चूम सकें और उनका प्रेम देह से अधिक आत्मीय हो जहाँ ऊर्जा का मिलन हो रहा हो वहाँ सचमुच महामिलन हो जाता है। इसलिए स्त्रियों को सोचना चाहिए और पुरूषों को भी कि कल्पना मे स्थिरता है कि नही ? भावनात्मक रूप से स्थिर होने मे हर सफलता का रहस्य छिपा है इसलिए जीवन को सिर्फ देह से नही आत्मा से जीना है और महसूस करना है कि मैं ऊर्जा हूँ।
Copyright ©️ Sdw