विद्यालय मर्ज सरकार मस्त छात्र बेहाल चित्रकूट जनपद का मामला

विद्यालय मर्ज होने से छात्रों का भविष्य अंधकार में सरकार को नही पड़ रहा फर्क
गाँव में स्कूल भवन होते हुए भी बच्चे पढ़ाई से दूर, पंचायत और विभाग की खींचतान में भविष्य अंधकारमय
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद का एक छोटा-सा गाँव आज पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। गाँव में प्राथमिक विद्यालय का भवन मौजूद है, लेकिन मासूम बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। कारण पंचायत, शिक्षा विभाग और स्थानीय राजनीति की जटिल रस्साकशी।
गाँव के ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से उप जिलाधिकारी को , राजापुर (चित्रकूट) को एक आवेदन दिया है, जिसमें उन्होंने बताया कि पंचायत के खसही क्षेत्र में बच्चों को शिक्षा के लिए लगभग 2 किलोमीटर दूर दूसरे गाँव खुरसिहा पैदल जाना पड़ता है। रास्ता घने जंगल, ऊँचे – नीचे कच्चे रास्तों और बारिश के दिनों में जलभराव से होकर गुजरता है जिससे छोटे बच्चों के लिए नियमित स्कूल जाना लगभग असंभव हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय भवन का निर्माण है जिसमे 43 छात्रों का नामांकन हो चुका था, फिर भी विद्यालय को मर्ज कर दिया गया। खसिहा विद्यालय के मर्ज होने से दूसरे मजरा खुरसिहा तक आना जाना असंभव हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि “जहाँ एक ओर सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘नए भारत की शिक्षा क्रांति’ की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक रस्साकशी बच्चों के भविष्य को निगल रही है। ” योगी सरकार के विद्यालय मर्ज करने का नियम बच्चों के भविष्य का काल बन गया।
गाँव के निवासी अमर सिंह सहित कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल इस विद्यालय में शिक्षा शुरू कराई जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके गाँव में ही मिल सके।
मुद्दे का विश्लेषण
यह मामला सिर्फ एक गाँव या एक भवन का नहीं है — यह उस प्रणालीगत विफलता का प्रतीक है जिसमें राजनीतिक निर्णय, स्थानीय स्तर की खींचतान और प्रशासनिक निष्क्रियता मिलकर शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार को भी बाधित कर देते हैं।
जहाँ देश नई शिक्षा नीति (NEP) को लागू कर डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बच्चे आज भी सड़क, सुरक्षा और स्कूल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह प्रशासन और सरकार दोनों के लिए शर्मनाक स्थिति है।
ग्रामीण अभिभावक शीघ्र ही धरना देने का अल्टीमेटम प्रशासन को दे चुके हैं किन्तु यह बहुत दुखद विषय है कि शिक्षा का अंधकार फैलाकर आखिर शासन प्रशासन चाहता क्या है। देश और दुनिया के लोग किस भारत की तस्वीर को देखें ? बड़ा सवाल है।