Mahoba breaking news सिंचाई निर्माण खंड महोबा में भ्रष्टाचार का बोलबाला

मुख्यमंत्री पोर्टल और प्रधानमंत्री पोर्टल पर लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं, लेकिन विभागीय कर्मचारी फर्जी आख्या लगाकर मामले को दबाने में जुटे हुए हैं।

जिम्मेदार अधिकारियों की मनमर्जी के आगे पात्र ठेकेदार बेबस

महोबा। जिले में भ्रष्टाचार मानो एक विकराल रूप ले चुका है। ऐसा प्रतीत होता है कि महोबा के कई विभागों में मानो अवैध कमाई की होड़ लगी हो। जिला प्रशासन और जीरो टॉलरेंस नीति की खुली धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। हालात यह हैं कि विभागों में बैठे कुछ अधिकारी ‘अजगर’ की तरह मोटे होते जा रहे हैं, जबकि जनता की गुहार अनसुनी कर दी जाती है।

अफसरों की चुप्पी पर सवाल, सोशल मीडिया पर भरा पड़ा आक्रोश

मुख्यमंत्री पोर्टल और प्रधानमंत्री पोर्टल पर लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं, लेकिन विभागीय कर्मचारी फर्जी आख्या लगाकर मामले को दबाने में जुटे हुए हैं। जिला प्रशासन की चुप्पी लोगों के मन में सवाल खड़े कर रही है , क्या महोबा में भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई की कोई मंशा नहीं?

TheFourthPillar24x7 को मिली जानकारी के अनुसार, जिले के कई बड़े मामलों की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है और कुछ मामलों पर तारीखें भी लगनी शुरू हो गई हैं। कई मामलों में कार्रवाई का भी इंतज़ार है।

ताज़ा मामला सिंचाई निर्माण मंडल महोबा में निविदाओं में गड़बड़ी का आरोप

नवीनतम खुलासा सिंचाई निर्माण मंडल महोबा से जुड़ा है। आरोप है कि ग्राम बहिंगा माइनर (किमी 0.000 से 4.200) में अवशेष मिट्टी कार्य और हेड रेगुलेटर निर्माण के लिए डाली गई निविदाओं में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है।

आरोप क्या हैं?

आरोप है कि टेंडर कमेटी ने अपने “चहेते ठेकेदारों” को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों की अनदेखी की। टेक्निकल बिड में कथित छेड़छाड़ कर पात्र ठेकेदारों को बाहर किया गया। कुपात्र ठेकेदारों को नियमों के विरुद्ध टेंडर जारी किए गए। पूर्व में करोड़ों के कामों में भी इसी तरह के हेरफेर का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

सूत्रों का दावा है कि यह खेल नई बात नहीं, बल्कि विभाग में लंबे समय से चल रही “व्यवस्था” का हिस्सा है। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की गंभीर शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की है।

क्या महोबा प्रशासन सो रहा है?

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लगातार सवाल उठा रहा है, सोशल मीडिया पर जनता नाराज़गी जता रही है, पोर्टलों पर शिकायतें भरी हुई हैं, इसके बावजूद जिला प्रशासन की चुप्पी साफतौर पर संदेह पैदा करती है।

लोग पूछ रहे हैं कि क्या महोबा में ‘राजा’ सच में अंधा है? या फिर आँखें होते हुए भी देखने से इनकार कर रहा है ? लेकिन यह भी सच है कि न्याय की कई सीढ़ियाँ होती हैं, और हर दरबार में राजा अंधा नहीं होता। अगर जिले में कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा मंच जरूर दखल देगा—ऐसा लोगों का मानना है।