SHARE
मैं सोशल मीडिया में 2008 से आया था। मेरा एक फेसबुक अकाउंट हुआ करता था और उसके साथ जुड़े हुए चार पेज थे। मुख्य फेसबुक ID में मेरे 5000 मित्रों के अलावा लगभग 32 हजार फॉलोअर्स थे। कई लोगों से बड़ी गहरी दोस्ती और मित्रवत पहचान हो गई थी। बाकी मेरे चारों पेजों को मिलाकर लगभग 3 लाख फॉलोअर्स थे।

दद्दा, आपके मूल घटनाक्रम और भाव को जस का तस रखते हुए अंत में दो अलग-अलग दुखों को स्पष्ट रखूँगा एक अपनी वर्षों पुरानी ID और मेहनत खोने का, और दूसरा प्रेमानंद जी तक अपनी बात न पहुँच पाने का। साथ ही यह विरोधाभास भी रहेगा कि जिनसे लोग प्रेम, करुणा और दया सीखते हैं, उन्हीं के यहाँ आपकी पीड़ा की सुनवाई नहीं हो सकी। भाषा संक्षिप्त, लगातार पैराग्राफों में और आपके मूल अंदाज में रख रहा हूँ।

मैं सोशल मीडिया में 2008 से आया था। मेरा एक फेसबुक अकाउंट हुआ करता था और उसके साथ जुड़े हुए चार पेज थे। मुख्य फेसबुक ID में मेरे 5000 मित्रों के अलावा लगभग 32 हजार फॉलोअर्स थे। कई लोगों से बड़ी गहरी दोस्ती और मित्रवत पहचान हो गई थी। बाकी मेरे चारों पेजों को मिलाकर लगभग 3 लाख फॉलोअर्स थे।

इसके अलावा मेरा एक यूट्यूब चैनल था, जिसके लगभग 15 हजार सब्सक्राइबर थे और वह मोनेटाइजेशन में था। यह बिल्कुल शुरू की बात है। मैं प्रेमानंद जी के अच्छे वीडियो अपने फेसबुक और अपने यूट्यूब चैनल पर डालता था, ताकि धर्म की अच्छी बातें अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचें।

लेकिन अचानक एक दिन मेरे यूट्यूब चैनल पर एक साथ दस स्ट्राइक हुईं और मेरा चैनल बंद कर दिया गया। मैंने पता किया कि किसने बंद करवाया और किसने स्ट्राइक की, तो पता चला कि वह टीम प्रेमानंद की थी और स्ट्राइक करने वाले का नाम नवल नगरी था। मैंने उन्हें ईमेल करके संपर्क किया, केलिकुंज में कॉल की, मिलने भी गया, लेकिन नतीजा सिफर अर्थात शून्य रहा। कोई सुनवाई नहीं हुई।

फिर कुछ दिन बाद मेरा फेसबुक भी सस्पेंड करवा दिया गया। इस बार भी नाम नवल नगरी का ही था। मैंने दोबारा संपर्क किया और बताया कि मेरा फेसबुक अकाउंट बहुत पुराना है। अगर वह चला जाएगा तो मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत नुकसान होगा, लेकिन वह नहीं माने। उनकी डिजिटल मीडिया और PR टीम ने साफ बोला कि यह हमारी आय का जरिया है।

फिर बाद में मुझे पता चला कि मैं अकेला नहीं हूँ, जिसकी ID गई है, बल्कि बहुत से लोग हैं। फिर मैंने प्रेमानंद जी से मिलने की कोशिश की। उधर से जवाब आया कि पहले प्रश्न बताओ। मैंने अपना प्रश्न बताया, लेकिन फिर बात नहीं करवाई गई। अब इस बात को लगभग चार साल हो रहे हैं।

मुझे उस समय बहुत दुःख हुआ था कि मेरी इतनी सारी मेहनत सिर्फ धन के लिए खराब कर दी गई, जबकि कार्य तो मेरा भी वही था—धर्म की अच्छी बातें लोगों तक पहुँचाना। मैंने यह भी कह दिया था कि अब आगे से कभी उनका वीडियो नहीं डालूँगा, फिर भी मेरी ID उड़ा दी गई। उस समय मन में यही आया था—बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया।

खैर, उसके बाद मैं शांत हो गया। फिर से एक नई फेसबुक ID बनाई, नया चैनल बनाया और अभी वही चला रहा हूँ। अपनी पुरानी ID और वर्षों की मेहनत का जाना आज भी मेरे लिए एक अलग दुख है। वह सिर्फ एक अकाउंट नहीं था, उसमें मेरी जिंदगी के कई साल, मेरी पहचान, मेरी मित्रताएँ और मेरी मेहनत जुड़ी हुई थी।

लेकिन इसके साथ एक दूसरा दुख भी है, जो उससे अलग है। वह यह कि जिस व्यक्ति के बारे में करोड़ों लोग कहते हैं कि उनसे प्रेम करना, दया करना, करुणा रखना और सबके प्रति संवेदनशील होना सीखना चाहिए, उन्हीं तक अपनी बात पहुँचाने की मेरी कोशिश भी बेकार चली गयी । मेरी शिकायत यह नहीं थी कि मेरा एकाउंट क्यों उड़ा दिया गया ; दुख यह है कि मेरी पीड़ा सुनने की कोशिश तक नही हुई।

आज इस खबर को पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने अपनी तकलीफ कई लोगों को बताई थी। उन्होंने मेरे दुःख को समझा भी था, लेकिन बाद में उन्हीं लोगों को प्रेमानंद जी की तारीफ करते और उनके नित्य दर्शन की लाइन में लगे हुए देखा।

मुझे उनसे कोई बैर नहीं है। न आज है, न तब था। मेरी तकलीफ सिर्फ इतनी है कि जिसने मेरा नुकसान किया, उससे तो मैं नाराज हो ही सकता हूँ, लेकिन जिससे मैंने प्रेम और करुणा की उम्मीद की थी, वहाँ अपनी बात न सुना जाना भी भीतर कहीं चुभता है। एक दुख मेरी वर्षों पुरानी ID और मेहनत के चले जाने का है और दूसरा दुख उस दरवाजे पर अपनी बात न सुने जाने का, जहाँ मैंने सोचा था कि शायद मेरी बात सुनी जाएगी।

क्योंकि प्रेम और दया की बातें बोलना बहुत आसान है, लेकिन असली परीक्षा शायद तब होती है, जब कोई दुखी होकर आपके दरवाजे पर अपनी बात लेकर आए। तब उसे सुन लेना ही उस प्रेम और दया का सबसे सुंदर पालन होता है।

खैर शनि न्याय के देवता है और इस समय वो वक्री है और जमकर न्याय कर रहे है।

From sharad k tripathi Fb wall

image_printPrint
0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes