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पर्यावरण, शिक्षा और सनातन मूल्यों की त्रिवेणी

चित्रकूट, उत्तर प्रदेश |

जनपद चित्रकूट की तपोभूमि एक बार फिर सामाजिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण और सनातन शिक्षा मूल्यों के सशक्त संगम का साक्षी बनी। एकल अभियान के प्रभाग योजना वर्ग के उद्घाटन सत्र में वृक्षारोपण से लेकर वैचारिक विमर्श तक की एक सांस्कृतिक यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि देश की आत्मा गांवों और गुरुकुलों में आज भी जीवित है।

■ वृक्षारोपण से शुरू हुआ अभियान

कार्यक्रम का शुभारंभ जय बजरंग सेना के संस्थापक नितिन उपाध्याय द्वारा जीवनदायिनी वृक्षारोपण से हुआ। उनके साथ अयोध्या के फायर ब्रांड महंत राजू दास ने भी वृक्षारोपण कर “हरित धरा–स्वस्थ भारत” का संदेश दिया। यह प्रतीक मात्र नहीं, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन के विरुद्ध सनातनी जागरण का स्वर था।

■ नेतृत्व और सहभागिता की मिसाल

कार्यक्रम की अध्यक्षता जय बजरंग सेना की राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय ने की, जिन्होंने एकल शिक्षा अभियान की भावना और क्रियान्वयन की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण भारत में नवचेतना का वाहक बताया।

पता | पुरानी बाजार कर्वी चित्रकूट

कार्यक्रम के अंतिम दिन नितिन उपाध्याय को एकल शिक्षा अभियान एवं सामाजिक समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। विशिष्टजनों ने इस अवसर पर रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग को भी स्वर दिया। यह मांग केवल एक धार्मिक आग्रह नहीं, अपितु भारतीय जीवन दर्शन को राष्ट्रनीति में प्रतिष्ठित करने की पहल मानी जा रही है।

■ सनातन का सतत संदेश

सम्मान स्वीकार करते हुए नितिन उपाध्याय ने कहा, “सनातन धर्म केवल धर्म नहीं, यह राष्ट्र, समाज, संस्कृति, पर्यावरण और प्रकृति—इन सभी का रक्षक है।” उनके उद्बोधन में एक स्पष्ट संदेश था कि आध्यात्मिक चेतना का जागरण, सामाजिक उत्तरदायित्व से पृथक नहीं हो सकता।

इस अवसर पर पूज्य मदन गोपाल दास जी महाराज एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक राम जी भाई साहब की प्रेरणादायी उपस्थिति ने कार्यक्रम को दिशा और दर्शन दोनों प्रदान किया।

■ चित्रकूट से निकला विचार-प्रवाह

चित्रकूट की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है—जहाँ शिक्षा, सेवा और संस्कार को सामाजिक नवोत्थान का आधार बनाया जा रहा है। संघ समर्थित एकल शिक्षा अभियान ग्रामीण भारत के दूरस्थ कोनों तक शिक्षा की ज्योति पहुंचाने वाला प्रयोग है, जो अब पर्यावरण और सांस्कृतिक चेतना से भी जुड़ चुका है।

यह आयोजन यह बताता है कि चित्रकूट केवल भूतकाल की स्मृति नहीं, वर्तमान और भविष्य की चेतना भी है। यहाँ से जो विचार उठता है, वह केवल एक जनपद का नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष के आत्मबल का प्रतिबिंब बनता है।

■ विशेष टिप्पणी :
ऐसे कार्यक्रम यह संकेत देते हैं कि जब अध्यात्म, संगठन और सेवा एक मंच पर आते हैं, तब एक नई राष्ट्रीय ऊर्जा का संचार होता है। चित्रकूट की यह पहल भारत के “ग्राम्य भारत से वैश्विक भारत” के यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर बन सकती है। इस दौरान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सत्येंद्र बारी उर्फ बीनू भाई ने अतिथियों का स्वागत अभिनंदन भी किया।

卐 लेखक पत्रकार सौरभ स्वतंत्र द्विवेदी 卐

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