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नीलम शर्मा की विदाई ने भावनाओं को किया उद्वेलित

उन्नाव जिला कोषागार में बुधवार को एक ऐसा भावुक क्षण देखने को मिला, जो किसी भी सरकारी दफ्तर के औपचारिक माहौल से परे था। जिला कोषाधिकारी नीलम शर्मा के कन्नौज स्थानांतरण के अवसर पर आयोजित विदाई समारोह, सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि उनके व्यवहार, सेवाभाव और सादगी के प्रति सहकर्मियों और पेंशनधारकों के आत्मीय लगाव का प्रमाण था।

प्रशासनिक पद पर एक मानवीय चेहरा

सरकारी सेवा में रहते हुए जहाँ अक्सर जिम्मेदारियाँ, नियम और समय सीमा प्राथमिकता होते हैं, वहीं नीलम शर्मा ने अपने व्यवहार में मानवीय संवेदनाओं को प्रमुखता दी। उनकी कार्यशैली ने यह स्पष्ट किया कि यदि अधिकारी चाहे तो सरकारी प्रक्रिया में भी मानवीय स्पर्श बनाए रख सकता है।

पेंशनरों ने उनकी सराहना करते हुए विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि उन्होंने जटिलताओं को सरल कर पेंशन प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाया। यह अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो अक्सर फाइलों के बोझ तले दब जाती है।

विदाई समारोह: संबंधों की मधुर स्मृति

जिलाधिकारी गौरांग राठी की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को विशेष बनाया। सहकर्मियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर जब शुभकामनाएँ दी जा रही थीं, तब माहौल में एक ऐसा मौन व्याप्त था, जो किसी विदाई के औपचारिक शब्दों से अधिक गहराई रखता है। विदाई में मुस्कानें थीं, परंतु उनकी आंखों में नम भावनाओं की झलक भी थी।

नीलम शर्मा ने इस अवसर पर अपने साथ काम करने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उनका यह वक्तव्य उनकी विनम्रता और सामूहिक सहयोग में विश्वास को दर्शाता है।

स्थानांतरण नहीं, नई जिम्मेदारियों की ओर कदम

यह स्थानांतरण एक विदाई है तो वहीं कन्नौज जनपद के लिए एक नई शुरुआत भी है। उन्नाव की टीम को विदाई की पीड़ा है तो कन्नौज को आशा की किरण मिली है कि उन्हें एक अनुभवी, संवेदनशील और कुशल कोषाधिकारी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

प्रेरणा बनती एक सरल विदाई:

सरकारी कार्यक्षेत्र में जब एक अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि दिलों में जगह बना लेता है, तब उसकी विदाई सिर्फ एक परंपरा नहीं रह जाती — वह एक प्रेरणा बन जाती है। नीलम शर्मा की विदाई ने यही सिद्ध किया।

उनकी कार्यशैली आने वाले अधिकारियों के लिए एक मानदंड है और उनकी विदाई, इस बात का प्रतीक कि ईमानदारी, सहयोग और संवेदनशीलता — प्रशासन में आज भी मूल्य रखते हैं।

( लेखक पत्रकार सौरभ स्वतंत्र द्विवेदी )

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