
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की पारदर्शी स्थानांतरण नीति पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वजह है— कोषाधिकारी अमरीश वाजपेई का लगातार ढाई वर्षों में तीन जिलों में तबादला और उसमें भी पुनः उसी जनपद में वापसी, जहां वे पहले लंबे समय तक पदस्थ रहे थे।
जानकारी के अनुसार, श्री वाजपेई का पहले तबादला फर्रुखाबाद से फिरोजाबाद किया गया। वहाँ मात्र तीन महीने की अल्प अवधि के बाद उन्हें कन्नौज भेज दिया गया। इसके 11 महीने बाद उनका स्थानांतरण पुनः फर्रुखाबाद में कर दिया गया। ये वही जनपद है जहाँ श्री वाजपेई वित्त एवं लेखाधिकारी, माध्यमिक के रूप में पहले ही लंबी सेवाएं दे चुके हैं।
अब बड़ा सवाल उठता है—क्या एक ही अधिकारी को बार-बार मनचाही तैनाती देना स्थानांतरण नीति का उल्लंघन नहीं है? योगी सरकार की घोषित नीति के अनुसार, एक स्थान पर लम्बे समय तक जमे रहने, पारदर्शिता, तथा योग्यता और आवश्यकता के आधार पर ही स्थानांतरण किया जाना चाहिए। लेकिन अमरीश वाजपेई का मामला इस नीति को धता बताते हुए ‘सिस्टम के भीतर किसी अदृश्य शक्ति की कृपा’ का संकेत देता है।

जबकि सच्चाई यह है कि कई योग्य और पात्र अधिकारी वांछित स्थानांतरण की प्रतीक्षा सूची में वर्षों से बैठे हैं, और उनकी सुनवाई नहीं हो रही। क्या ये नीति केवल कागजों पर है? क्या कुछ खास अधिकारी ही बार-बार ‘इनाम’ के हक़दार बनते रहेंगे?
वित्त विभाग के अंतर्गत आने वाले इस प्रकार के तबादलों में राजनीतिक प्रभाव, उच्चाधिकारियों की निजी पसंद और सिफारिशों का बोलबाला लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। लेकिन जब सरकार खुद सुशासन और पारदर्शिता की बात करती है, तो फिर इस तरह के ‘दोहरे मापदंड’ किसके इशारे पर अपनाए जा रहे हैं?
प्रदेश की जनता, खासकर विभागीय कर्मियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर एक ही अधिकारी को तीन बार ‘विशेष ट्रीटमेंट’ क्यों? क्या अन्य अधिकारी केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
प्रदेश शासन और विशेषकर मुख्यमंत्री कार्यालय को चाहिए कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि क्या अमरीश वाजपेई का यह बारंबार स्थानांतरण नीति के अनुरूप है या नीति के विपरीत कोई ‘नेटवर्किंग’ चल रही है।
यदि स्थानांतरण नीति का पालन नहीं हुआ है, तो यह सिर्फ एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक नैतिकता का भी गंभीर विषय है।
卐 लेखक पत्रकार सौरभ स्वतंत्र द्विवेदी 卐
[ यह खबर विश्लेषण सूत्रों की सूचनाओं पर आधारित है ]








