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प्रकृति ने स्त्री देह और पुरूष देह इसलिए दी है कि दोनों को एक दूसरे की तासीर से अद्भुत आनंद का अहसास हो सकेगा , दोनो एक दूसरे को आत्मा की ऊर्जा से महसूस कर प्राप्त करेंगे तो अंदर समा जाने का अर्थ जान सकेंगे और अद्भुत अद्वितीय ऊर्जा का निर्माण कर सृष्टि का सृजन करेंगे किन्तु हो क्या रहा है ?

सोशल मीडिया मे एक रंग बिरंगी तस्वीर नजर के सामने आयी तो सबसे पहली आवाज निकलकर सामने आयी कि यह नया खजुराहो है। जो एक स्त्री की तस्वीर है और एक खास योग दिशा मे बैठी हुई है जो वास्तव मे हर नजर को आकर्षित करेगी।

वायरल तस्वीर के पीठ से लेकर कमर और नितंब तक चलचित्र बने हुए थे। जैसे शैलचित्र पर्वतों मे मिल जाते हैं तो कहा जाता है कि ऐतिहसिक खोज है। वैसे ही चित्रों से सजी – धजी तस्वीर मन मोह लेने वाली है , अब मेरे मन को मोह लेने से ना जोड़ा जाए क्योंकि मैं उस तस्वीर की व्याख्या अनेक दृष्टांत से कर रहा हूँ।

स्त्री देह के प्रति सहज आकर्षण बना रहा है वो कोई भी हो यहाँ तक की बुजुर्ग पुरूष भी हो तो वह भी एक नजर देखता रहेगा और अंदर मन मे कोई युवा मन जाग जाएगा। वह उस तस्वीर को देखकर लालायित होगा और मन ही मन प्रशंसा करेगा , आशा भी कर सकता है।

कि आह्ह कितनी सुंदर है और इसके पीछे की सहज इच्छा पा लेने की होती है। भले वह पा ना सके या उस स्त्री का पात्र ना बन सके किन्तु पुरूष सदियों की तरह आज भी वही है , बहुत कम पुरूष होते हैं जो मन और आत्मा के मिलन से ही किसी स्त्री से मिलन को पूर्ण महसूस करते हैं।

दीक्षा यह दी जानी चाहिए कि देह से मतलब तब सिद्ध होगा जब वह स्त्री मन से मिल जाए , आत्मा से खुद को समर्पित कर दे और पुरूष भी जब मन से उस स्त्री को महसूस करता हो और आत्मा की ऊर्जा से स्वीकार करता हो तब जो प्रेम दोनो के आंतरिक भूमि मे अंकुरित होगा उपजेगा तो वह जीवन भर का आनंद महसूस करा देगा।

किन्तु हम यही पर हार गए , हमारा पूरा समाज हार गया। वह नग्न स्त्री देखकर खुलेआम आलोचना करेगा किन्तु अकेले मे नग्न स्त्री को जी भरकर देखेगा अपने अंदर की हवस को बढ़ने देगा और तो और मन का कुआं खोदकर अंतहीन स्त्रोत खोल देगा। जिसका परिणाम उसे खुद नही पता , इसलिए निंदा बाहर सुनाई देती है लेकिन आनंद अंदर ही अंदर लिया जा रहा होता है।

स्त्रियाँ जब कभी थोड़ी-बहुत स्वतंत्रता पाती हैं तो कब वह स्वच्छंदता मे बदल जाती है इसका वह अंदाजा नही लगा सकती हैं जिसका उदाहरण फेसबुक इंस्टाग्राम रील आदि मे खूब देखने को मिलता अगर यही स्त्रियाँ स्वतंत्रता का ठीक ढंग से पालन करें तो उनका जीवन बहुत अच्छा हो सकता है।

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इसलिए स्त्री हो या पुरूष उनको निजता का सम्मान करना होगा। निजी अंग को हर किसी को नही दिखाया जा सकता है जैसे खजुराहो मे नग्न मूर्तियाँ हैं लेकिन इसलिए कि पहले देह की हवस से परे हो जाओ फिर आत्मा को महसूस करोगे और परमात्मा को जान पाओगे।

प्रकृति ने स्त्री देह और पुरूष देह इसलिए दी है कि दोनों को एक दूसरे की तासीर से अद्भुत आनंद का अहसास हो सकेगा , दोनो एक दूसरे को आत्मा की ऊर्जा से महसूस कर प्राप्त करेंगे तो अंदर समा जाने का अर्थ जान सकेंगे और अद्भुत अद्वितीय ऊर्जा का निर्माण कर सृष्टि का सृजन करेंगे किन्तु हो क्या रहा है ? इसलिए वायरल तस्वीर की खूबसूरती को देखिए और साहस का सम्मान करना चाहिए बाकी तो अभी सबको बहुत कुछ सीखने की जरूरत है अगर जीवन सही मायने मे जी कर मरना है।

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