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धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म के खिलाफ जब कोई लड़ाई लड़ने को संकल्पित ना हो तो ऐसे समाज के लिए क्या लिखा जाए ? बेशक विश्वविद्यालय हो या समाज का कोई हिस्सा तथाकथित राजतंत्र के नाम पर शोषण का रोना रोकर आज की वर्तमान पीढ़ियों के साथ अन्याय किया जा रहा है

नपुंसक हो क्या ? श्रीकृष्ण ने उपदेश देते हुए सबसे पहले अर्जुन को कहा था कि नपुंसक हो क्या ? श्रीकृष्ण ने अर्जुन के साथ शोक नही मनाया और ना मोह मे पड़कर अर्जुन का साथ दिया बल्कि ऐसा उपदेश दिया कि अर्जुन को युद्ध करने के लिए जागृत किया।

सवर्ण समाज का भी यही हाल है कि अन्याय पर अन्याय हो रहा है और हिन्दुत्व के नाम पर हो रहे अन्याय का साथ दे रहे हैं हूबहू अर्जुन की तरह कि सब मेरे सगे संबंधी तो हैं आखिर मैं अपने गुरु का वध क्यों करूं ? किनको मारूं जो मेरे अपने भाई बंधु हैं।

धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म के खिलाफ जब कोई लड़ाई लड़ने को संकल्पित ना हो तो ऐसे समाज के लिए क्या लिखा जाए ? बेशक विश्वविद्यालय हो या समाज का कोई हिस्सा तथाकथित राजतंत्र के नाम पर शोषण का रोना रोकर आज की वर्तमान पीढ़ियों के साथ अन्याय किया जा रहा है या यूं कहें कि कुरूक्षेत्र के मैदान मे लोकतंत्र के कथित कानून के चक्रव्यूह मे सवर्ण अभिमन्यु वध किया जा रहा है।

इसलिए अब रामायण हो चुकी है , राम मंदिर बन चुका है अगर श्रीकृष्ण के अनुसार अर्जुन नपुंसक नही है तो फिर महाभारत के लिए तैयार हो जाओ क्योंकि कल्कि अवतार का समय भी नजदीक आ चुका है और तीसरा विश्व युद्ध भी 2026 मे हो सकता है तो यह बहुत महत्वपूर्ण समय है कि अभिमन्यु की तरह वध करवा लो या फिर धर्म का युद्ध करो।

महाभारत ही होनी चाहिए और मैं दोबारा तभी लिखूंगा जब मुझे सामान्य वर्ग संकल्पित दिखेगा जब सामान्य वर्ग साथ देता नजर आएगा तभी कुछ बोलूंगा अन्यथा यह पहली और अंतिम पोस्ट होगी क्योंकि जो वर्ग कथित निजी लाभ के लिए अर्जुन की तरह नपुंसक नजर आ रहा हो जो लड़ाई लड़ने वालों का साथ देना ना जानता हो उनको लोकतंत्र के कानूनी चक्रव्यूह मे मर जाना चाहिए।

तथास्तु 

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