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यह आंदोलन लंबे समय से भीतर-ही-भीतर सुलग रहा था। “नेपो-किड्स” यानी नेताओं के बच्चों के विरुद्ध शुरू हुए इस आंदोलन ने वहाँ फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बुलंद आवाज उठाई।

युवा परिवर्तन के वाहक होते हैं, यह निर्विवाद सत्य है — किंतु यह परिवर्तन सकारात्मक दिशा में होना चाहिए।”

विश्व इतिहास साक्षी है कि जहाँ भी कोई बड़ा परिवर्तन हुआ है, वहाँ उस देश के युवाओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही है। वर्तमान समय में युवाओं की उपेक्षा नहीं की जा सकती, क्योंकि उनमें असीम ऊर्जा, नवविचार और परिवर्तन की शक्ति होती है।

इसलिए हर कार्य में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। जो समाज या व्यवस्था युवाओं की आवाज को नजरअंदाज करती है, वहाँ बदलाव नहीं, बल्कि क्रांति जन्म लेती है।

भारत के मित्र राष्ट्र नेपाल में हाल ही में “जेन-जेड” युवाओं द्वारा शुरू की गई क्रांति इसका स्पष्ट उदाहरण है। यह आंदोलन लंबे समय से भीतर-ही-भीतर सुलग रहा था। “नेपो-किड्स” यानी नेताओं के बच्चों के विरुद्ध शुरू हुए इस आंदोलन ने वहाँ फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बुलंद आवाज उठाई।

लेकिन अफ़सोस की बात है कि वहाँ की सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया। आज का युवा जागरूक है, वह खुली आंखों से सब कुछ देखता और गहराई से समझता है।

वह अन्याय के विरुद्ध चुप नहीं बैठ सकता। नेपाल के युवाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि जब उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जाती है, तो वे और अधिक संगठित और मुखर हो जाते हैं। उनका आंदोलन आक्रामक रूप में सामने आया, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया ने देखा।

लोकतंत्र में सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है — और युवाओं की भागीदारी तो अत्यंत आवश्यक है। एक समय कहा जाता था कि “युवा देश का भविष्य हैं”, लेकिन आज के युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल भविष्य नहीं, वर्तमान भी हैं।

वे आज के नागरिक हैं, और यदि देश को किसी भी समस्या का सामना करना पड़े, तो समाधान का मार्ग भी वही प्रशस्त करेंगे।

प्रखर मिश्रा
कन्नौज , उत्तर प्रदेश

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