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अगर संभोग से मुक्त नही हो सकते तो सीमा आनंद से मुक्त नही हो सकते बल्कि सीमा आनंद को उसकी लजीज बातों को स्वीकार करोगे

सीमा आनंद संभोग सिखा रही है तो गुनाह है क्या ?

क्या कहूँ सेक्स क्या है ? सीमा आनंद इन दिनों सोशल मीडिया मे खूब वायरल हैं जो इन दिनों लेडी ओशो या यूं कहें कि सीमा आनंद का व्यक्तित्व ही असीम है। उसने नब्ज पर बात की है जिसमे सफलता – असफलता का भी रहस्य छिपा है।

कर सब वही रहे हैं जिसकी वह सिर्फ बात कर रही है , वह हवस की नही बल्कि आनंद की ओर संकेत कर रही है और आनंद से परमानंद की प्राप्ति को शास्त्र भी कहते हैं तो फिर कौतुहल क्या है ?

कौतुहल पुरूष मे है और समाज के कथित ठेकेदार मे है जो आदर्श का ढकोसला ताने रहते हैं और वहीं बलात्कार हो रहे हैं या फिर संभोग के आनंद के अभाव मे डिप्रेशन से जी रहे हैं लोग। इसलिए सीमा आनंद चर्चा का विषय है क्योंकि वह डिप्रेशन मुक्त जीवन पर बात करती है वह महिला हो या पुरूष !

अगर संभोग से मुक्त नही हो सकते तो सीमा आनंद से मुक्त नही हो सकते बल्कि सीमा आनंद को उसकी लजीज बातों को स्वीकार करोगे , अगर प्रेम मे हो तो ऊर्जावान प्रेम होना चाहिए जो ऊर्जा का ऊर्जा से प्रेम हो जिसमे देह सिर्फ आधार होती है और प्रेम ऊर्जा कर रही होती है। तब शब्दों से भावनाओं से संभोग होने का मतलब होगा कि दो ऊर्जा का महामिलन संपन्न हो रहा है।

जब जनसंख्या बढ़ ही रही है तो मतलब संभोग अनलिमिटेड हो रहा है , किन्तु उस विषय पर आवश्यक जानकारी होना सहज स्वीकार नही तो क्यों ? अगर जानकारी होगी और संभोग को भी आध्यात्मिक भाव से आत्मीय अहसास से करना जान जाएंगे तो फिर तय है कि ना भीड़ पैदा होगी ना बलात्कार होंगे क्योंकि अभी तक जो भी अपराध हो रहा है उसका बड़ा कारण यही है कि प्रेम संभोग और सुखद जीवन के मूल मार्ग को समझ नही सके।

इसलिए सीमा अगर संभोग को समझा पा रही है तो गुनाह है क्या ? यह गुनाह नही हो सकता।

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