
कभी कोई बहुत खुश, उत्साही और एनर्जेटिक दिखता है तो कोई बिना वजह निराश, उदास और चुप चुप सा रहता है। कभी जाना है इसके पीछे का राज? इसके पीछे छुपे हुए है मुख्यत चार हार्मोन सेरोटोनिन, डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन। ये हार्मोन हमारे शरीर के रासायनिक संदेशवाहक होते है जो हमारी खुशी, भूख, नींद और पारिवारिक जीवन को नियंत्रित करते हैं।
इसे इस तरह समझ सकते हैं कि जब सेरोटोनिन पर्याप्त मात्रा में शरीर को मिलता है तो हम संतुलित जीवन जीते है और सही समय पर नींद और भूख लगती है और अगर ये हार्मोन ज्यादा मात्रा में स्रावित होने लगे तो आप ओवरइटिंग यानी मोटापे के शिकार भी हो सकते है उसी तरह डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो इंसान में खुशी और उत्साह बनाए रखता है अगर इसकी कमी हो जाए तो व्यक्ति उदास, थकावट, निराश और नींद न आने की समस्या से ग्रसित हो सकता है। इसकी अधिकता भी एक तरह मनोरोग को जन्म दे सकते हैं।

जैसे सिजोफ्रेनिया,ADHD । वहीं बात अगर ऑक्सीटॉसिन हार्मोन की करें तो इसे प्रेम हार्मोन का नाम दिया गया है। ऑक्सीटॉसिन प्रसव, स्तनपान, माता पिता के बच्चे के साथ मजबूत रिश्ते के लिए जरूरी होते हैं। ये विश्वास, प्यार, सहानुभूति, और अच्छे प्रेम संबंधों में सहायक होते हैं। एंडोर्फिन हार्मोन हमारे शरीर में प्राकृतिक दर्द निवारक का काम करता है और अगर इसकी कमी हो जाए शरीर में दर्द, थकावट का अनुभव होने लगेगा।

इसकी कमी से चिंता अवसाद भी रहने लगता है।
कुल मिलाकर ये चार मुख्य हार्मोन या कहे शरीर में रासायनिक स्राव का नियंत्रित रहना बहुत जरूरी है, तभी हम खुश, प्रसन्न, सफल और अच्छे परिवार, समाज का निर्माण कर सकते हैं तो अब ये जानना बहुत जरूरी है कि किस तरह का खानपान या दिनचर्या बनाई जाए कि एक अच्छा और संतुलित जीवन जिया जा सकें।
कुछ प्राकृतिक उपाय है जिससे बिना अपने जीवन को बेहतर और स्वस्थ्य रहकर जिया जा सकता हैं –
1– व्यायाम – वैसे तो बहुत बेहतर होगा कि आप सुबह उठकर नियमित योग, स्ट्रेचिंग, जिम या दौड़ना जैसा कोई शारीरिक गतिविधि वाला काम करें। लेकिन आजकल की व्यस्त दिनचर्या में ये संभव नहीं होता.. अगर महिला तो सुबह घर का काम, बच्चों का टिफिन बनाना , स्कूल छोड़ना और पुरुषों को ऑफिस जाने की जल्दी में ये संभव नहीं होता तो कोई बात नहीं ये टहलना, दौड़ना या जिम जाना आप शाम को भी आधे घंटे कर सकते हैं। और अगर ये भी संभव हो तो वीकेंड यानी शनिवार, रविवार को एक एक घंटे जरूर पसीना बहाए या कोई खेल आपको पसंद है तो उसे खेलना शुरू करें इससे आपका एंडोर्फिन,सेरोटोनिन बैलेंस में रहेगा। साथ ही समय पर सोना और स्क्रीन टाइम कम करना भी बहुत जरूरी है। सोने से कम से कम आधे घंटे पहले टीवी, मोबाइल छोड़कर थोड़ी वॉक कर ले या कोई मनपसंद किताब पढ़ ले।
2– खानपान – व्यायाम के बाद दूसरा महत्वपूर्ण बात खानपान की आती है। हेल्थी डाइट फॉलो करें। ये जो आजकल बहुत आसान पहुंच वाले फूड, ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप आ गए है इन्होंने हमारी खानपान की आदतों को एकदम बदल ही दिया है। जहां घर में पहले हम कुछ अच्छा पकाना पसंद करते थे अब आलस्य या बीजी होने पर कुछ भी मंगा कर खा लेते हैं। ये कुछ भी खा लेने की आदत आपके साथ साथ बच्चों की भी आदत बिगाड़ रही है और कई तरह की बिन बुलाई बीमारियां हाइ बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल के साथ साथ बहुत कुछ गुड हार्मोन का भी बैलेंस बिगाड़ रहा हैं। सप्ताह में एक दिन का बाहर का खाना बाकी की नियमित दिनचर्या को बैलेंस कर सकता है इस बात का विशेष ध्यान रखें। इससे डोपामाइन का स्तर बना रहेगा।
3– अच्छा संगीत– एक खुशनुमा माहौल में बैठकर मनपसंद म्यूजिक सुनने से आपका डोपामाइन का स्तर बूस्ट करेगा और आप को भीतरी खुशी, आनंद का अहसास होगा। अपने मनपसंद गानों की लिस्ट तैयार करना और उसे सुनना खासकर तब जब आपको अच्छा न फील हो रहा हो तो ये मूड को तुरंत खुशगवार कर देगा।
4– सामाजिक मेलजोल– पारिवारिक मेलजोल रिश्तेदारों से किसी उत्सव या इवेंट में मिलते रहना, दोस्तों से समय समय पर मिलना, उनसे हाथ मिलाना, गले लगाना, साथी से संबंध या चुंबन आपके ऑक्सीटॉसिन हार्मोन के लेवल पर बनाए रखेगा। अपने पार्टनर से अच्छे संबंध आपके डोपामाइन और ऑक्सीटॉसिन दोनों ही हार्मोन को संतुलित रखेंगे। साथी के लिए समय निकालना, उनके साथ आउटिंग करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखेगा। अगर आप सिंगल है तो अच्छे दोस्तों से मिलना जुलना, उनसे मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए हाथ मिलाना, गले लगना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
5– सेल्फ लव – आप मेल हो या फीमेल, सिंगल या कपल सेल्फ केयर और सेल्फ लव सभी के लिए बहुत जरूरी है। कम से कम हफ्ते में कुछ समय केवल खुद के लिए निकाले। इसमें आप पार्लर जाकर मसाज, फेशियल, स्किन केयर, हेयर केयर करवा सकती है या घर पर खुद को खुद से ही प्रेप कर सकते है/सकती हैं। इससे न केवल आपका फिजिकल अपीयरेंस बेहतर होगा बल्कि शरीर के लिए जरूरी गुड हार्मोन उचित मात्रा में रिलीज होंगे। इसके अलावा आपका कोई भी शौक जैसे खेलना, गाना, पढ़ना या कुछ भी हो कुछ समय उस शौक को पूरा करें और अपनी अपनी व्यक्तिगत खुशी का भी अहसास खुद को दिलाए।।
अब समय ऐसा आ चुका है कि शारीरिक स्वास्थ्य से ज्यादा मानसिक स्वास्थ्य पर सोचने, विचारने की जरूरत है। पार्टनर से अलगाव, कोर्ट में सैकड़ों पड़े लंबित केस, मानसिक अस्पतालों में कम उम्र युवाओं की भीड़ हमें ये बताती है हम अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति कतई गम्भीर नहीं हैं।
केवल अच्छे नंबरों से पास होना और अच्छी नौकरी मिलना ही खुशी दे सकता है जरूरत है रुक कर सोचने, समझने और विचारने की। कुछ कम समय नौकरी या काम पर देकर बचे हुए समय पर अपनी बेशकीमती जीवन जी ले क्योंकि “जिंदगी मिलेगी ना दोबारा ।“








