
इन दिनों भारत मे एक महिला चर्चा मे है या यूं कहें उसने लोगों के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। जिज्ञासा पैदा कर दी है कि और जाना जाए इस महिला के विषय मे या फिर और जाना जाए जो कुछ ये महिला बताना चाहती है।
असल मे सीमा आनंद शायद ही नही सतप्रतिशत असीम आनंद की ओर संकेत कर रही है जो सीमा से परे आनंद होता है और इसी को आनंद को सभी प्राप्त करना चाहते हैं या फिर महसूस करना चाहते हैं और यह आनंद एक पल मे सिर्फ एक पल के लिए आता है उसके बाद सुकून का बीज अंकुरित हो चुका होता है कि महकते रहो आनंद के खिल उठे पुष्प को जो अभी अभी ऊर्जा के आनंद की किरणों का स्पर्श पाकर खिल चुका है।
तो वहीं अनगढ़ जैसा संभोग करने वालों को चेताना चाहती है कि यह कला है जिसमे देह पहले जरूरी शर्त है कि आत्मा का मिलन हो और आत्म तत्व सबूत के तौर पर महसूस हो इसलिए संभोग दैहिक जोशीला सुख भर नही है बल्कि वह इसके आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करती है।
अगर स्वर्ग की कल्पना है तो देव और देवी की भी कल्पना है जैसे कि अप्सरा स्वर्ग लोक की इस भाव से देखी जाती है कि पृथ्वी की वैश्या हो लेकिन अप्सरा का सौंदर्य आध्यात्मिक पक्ष वाला है। जिसमे वह संभोग को कला के रूप मे आनंद लेती है और आनंद देती है। इसलिए पति पत्नी हों तो उनमे प्रेम होने पर जो संभोग होगा वही वैध है जबकि आदतन हक से किया गया दैहिक लाप अवैध है अगर नैतिकता के मर्यादित पक्ष पर ध्यान दिया जाए तो पूर्ण सत्य यही है और यही कहना चाहती है प्रसिद्ध सेक्स एजुकेटर सीमा आनंद।
सेक्स एजुकेटर से बड़ी बात कहूंगा कि सीमा आनंद लाइफ एजुकेटर कहलाएं या लाइफ लीडर कही जाएं उनकी पसंद पर है कि लाइफ एजुकेटर अच्छा लगे जिससे एक वृहद पक्ष उजागर होगा लेकिन यह भी तय है कि जितना सेक्स या संभोग की कला जैसे शब्द लक्ष्य भेदते हैं उतना लाइफ एजुकेटर ध्यान केन्द्रित नही करेगा , तो यह अट्रैक्शन की बात है।
इस बीच ही देश भर की विवाहित अविवाहित महिलाओं और लड़कियों का ध्यान उसने अपनी ओर आकर्षित किया है जिसे कोई बाहर कहेंगी नही किन्तु अंदर ही अंदर असंतुष्टि को स्वीकारते हुए खुद से सवाल – जवाब जरूर कर रही हैं।
असल मे जीवन इतना ही सरल है जैसा सीमा जीवन की कला को सिखाते हुए अहसास कराना चाहती हैं और बदलाव भी इसी द्वार के अंदर पहुंच कर सुधार करने मे छिपा है। और जब तक ऐसा नही होगा तब तक रेप की दर बढ़ेगी और संभोग कर के भी असंतुष्ट रहेंगे वह नारी हो या नर हो।
इसलिए प्रेम संभोग और आत्मा के रिश्ते को फील करना चाहिए बाकी देह आधार तो है ही , इसलिए वह कहती हैं कि प्लेजर की बात करनी चाहिए। बशर्ते उसका एक टाइम है इसलिए साफ संकेत है कि वह अनियंत्रित संभोग की ओर इशारा नही कर रहीं बल्कि समय और इमोशंस के लेवल पे टिक के नियंत्रित संभोग करने की ओर संकेत कर रही हैं और सचमुच मानसिक संभोग चरमसुख को महसूस कराता है।
यही वो तमाम कारण हैं कि ओशो के बाद आधुनिक युग मे सीमा आनंद सबसे ज्यादा चर्चित दार्शनिक ना बन जाएं ! यह सवाल ही नही जवाब भी है। किन्तु आज भारत की हर आंख टकटकी लगाकर देख रही है और कान सुन रहे हैं तो सीमा आनंद ने कुछ इस तरह धड़कन बढ़ाई हुई है कि पति को डर लगेगा कि पत्नी कह दे कि तुम मुझे संतुष्ट नही कर पा रहे , कि तुम जानवर की तरह ना चढ़ो और आओ अगर तो प्रेम महसूस करा के अगर पाओ मुझे तो प्रेम से मानसिक स्वीकार करने से अन्यंथा छुओ नही मुझे और जिस दिन ऐसा हो जाएगा तो सीमा आनंद सफल हो जाएगी वो 63 की उम्र में !
सात्विक








