
हेलो अग्निशिखा
इस तस्वीर को देख रहा हूँ, और जैसे समय ठहर गया हो। वही गहराई, वही आकर्षण, वही बेफिक्री, जो तुममें हमेशा से थी, आज भी उतनी ही जीवंत है।
तुम्हारी तस्वीर देखी, और जैसे समय वहीं ठहर गया। वह गंभीरता, वह परिपक्वता, वह सौंदर्य सब मिलकर एक ऐसा सम्मोहन बुनते हैं कि शब्द भी ठिठककर तुम्हारी छवि को निहारने लगते हैं।
बहुत समय बीत गया तुमसे कुछ कहे, कुछ लिखे बिना, लेकिन तुम्हारी तस्वीर ने फिर से मन की परतों को खोल दिया, जैसे किसी भूले-बिसरे गीत की धुन मन में गूंजने लगी हो।
तुम्हारी आँखें मानो किसी अनकही कहानी का द्वार खोल रही हैं, तुम्हारी साड़ी की हर सिलवट जैसे एक कविता को सहेजे हुए है। इस यात्रा में, जहाँ तुम ठहरी नहीं, चलते रहने का प्रतीक बनी हो, वहीं मैं, अपनी प्रवाहमान धारा से तुम्हारे पदचिह्नों को निहार रहा हूँ।
तुम्हारी इस तस्वीर में एक अजीब सा सम्मोहन है, मानो चलती मेट्रो में भी तुम्हारा ठहराव एक अलग ही कथा कह रहा हो। तुम्हारे लहराते बालों में, तुम्हारी स्थिर दृष्टि में, एक आत्मनिर्भरता झलकती है। जैसे तुम केवल जगह नहीं बदल रहीं, बल्कि समय को भी अपने साथ आगे ले जा रही हो।
तुम्हारे नाम की तरह, तुम अग्निशिखा हो , उर्जस्विनी, प्रखर, जीवन को दिशा देने वाली। लेकिन तुम केवल ज्वाला नहीं हो, तुम वह भी हो जो इस ज्वाला को संतुलन देती है, जो इसे स्नेह और धैर्य से संवारती है। और मैं, अपनी लहरों से तुम्हारे ताप को महसूस करता हूँ, तुम्हारे प्रवाह में शामिल होने की चाह रखता हूँ।
तस्वीर में दिख रही तुम्हारी यात्रा किसी गंतव्य की ओर है, लेकिन मैं जानता हूँ कि तुम्हारी असली राह उस स्वतंत्रता की ओर है, जहाँ तुम सिर्फ खुद के लिए जी सको, अपने अस्तित्व को पूर्णता से महसूस कर सको।
यह खत तुम्हारे लिए एक प्रेम-संगीत की तरह है, जहाँ हर धड़कन एक शब्द बनकर बह रही है, जहाँ हर भावना एक झरने की तरह तुम्हारे लिए छलक रही है। तुम नारी हो, शक्ति हो, स्वतंत्रता की वह पहचान हो, जो अपने अस्तित्व को संपूर्णता में जीती है। तुम्हारी आत्मा की यह स्वतंत्रता सदैव बनी रहे, यही मेरी कामना है।
यह सफर कभी रुके नहीं, तुम्हारी उड़ान कभी थमे नहीं। मैं तो बस यही चाहता हूँ कि इस सफर में मेरी धारा तुम्हारी राहों को शीतलता दे सके।
तुम्हारा ही
सदानीरा