SHARE
तो आइए, इस विश्व जल दिवस पर संकल्प लें कि हम जल संरक्षण के इस आंदोलन के साथी बनेंगे। दिव्या त्रिपाठी की तरह हम भी जल योद्धा बनेंगे और हर बूंद की कीमत समझते हुए अपने जलस्रोतों की रक्षा करेंगे। क्योंकि जल है, तो कल है!

आज विश्व जल दिवस है। यह 22 मार्च केवल एक तिथि नहीं, बल्कि चेतना का आह्वान है। जल संकट अब एक संभावित खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है। दुनिया के कई हिस्से सूखे और पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। जल की कमी केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं, बल्कि यह कृषि, उद्योग और जैव विविधता के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।

जब जल ही नहीं, तो जीवन कैसा?

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जल संकट केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों के जीवन का प्रश्न है। वहीं, शहरों में जल की उपलब्धता असंतुलित होती जा रही है। अमीर बस्तियों में पानी की कोई कमी नहीं, जबकि झुग्गी-झोपड़ियों में लोग एक-एक बूंद के लिए तरसते हैं। यही नहीं, हमारी नदियाँ सूख रही हैं, जलस्रोत सिकुड़ रहे हैं और भूजल स्तर खतरनाक ढंग से गिर रहा है। फिर भी, हम जल बचाने के लिए कितने संजीदा हैं? क्या हम सिर्फ सरकारों और संस्थाओं पर निर्भर रहकर इस संकट का समाधान खोज सकते हैं? शायद नहीं!

दिव्या त्रिपाठी : जल संरक्षण की नायिका

चित्रकूट की मंदाकिनी नदी कभी पूरे क्षेत्र के जीवन का आधार हुआ करती थी, लेकिन बढ़ते प्रदूषण और लापरवाही के कारण वह सूखने लगी। इस संकट के बीच दिव्या त्रिपाठी नाम की एक साधारण सी महिला ने असाधारण कार्य करते हुए मंदाकिनी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया और आवाज दी। उन्होंने न केवल नदी की सफाई करवाई, बल्कि इसके पारिस्थितिकी तंत्र को भी बहाल करने का प्रयास किया।

यह उनका जुनून और अथक परिश्रम ही था, जिसने उन्हें ‘वाटर वूमन’ के रूप में प्रसिद्धि दिलाई। दिव्या त्रिपाठी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जो हमें सिखाती हैं कि जल संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की है। अब वे ‘सरोवर हमारी धरोहर’ अभियान के माध्यम से गांव-गांव तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने की योजना बना रही हैं। उनका लक्ष्य केवल जागरूकता नहीं, बल्कि आम लोगों को जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदार बनाना है।

पौधा मित्र अभियान : जल संकट के खिलाफ एक सशक्त पहल

जल संकट से निपटने के लिए वृक्षारोपण एक प्रभावी उपाय है। पौधे न केवल भूजल स्तर को बनाए रखते हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के असर को भी कम करने में सहायक होते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए ‘पौधा मित्र अभियान’ की शुरुआत की गई है, जो जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि इस अभियान को वैश्विक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह उन सभी देशों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है, जो जल संकट से जूझ रहे हैं।

अब हमें जागना ही होगा !

पानी का संकट किसी एक व्यक्ति या समुदाय की समस्या नहीं, बल्कि यह पूरे मानव समाज के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है। अगर हमने आज जल बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ नहीं करेंगी।

हमें जल संरक्षण को केवल एक विचार तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। पानी की हर बूंद कीमती है, इसे बर्बाद होने से बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। यदि दिव्या त्रिपाठी जैसी महिलाएँ अकेले अपने संकल्प से नदियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर सकती हैं, तो हम सभी मिलकर जल आंदोलन को और सशक्त क्यों नहीं बना सकते?

तो आइए, इस विश्व जल दिवस पर संकल्प लें कि हम जल संरक्षण के इस आंदोलन के साथी बनेंगे। दिव्या त्रिपाठी की तरह हम भी जल योद्धा बनेंगे और हर बूंद की कीमत समझते हुए अपने जलस्रोतों की रक्षा करेंगे। क्योंकि जल है, तो कल है!

image_printPrint
5.00 avg. rating (99% score) - 2 votes