
”प्यारी स्वरा बाइसा” … पहली बात तो यह कि आपकी कही बात से मन को पीड़ा हुई पर यह प्रेमपगा सम्बोधन इसलिए कि आप उस दौर में होतीं तो जिन स्त्रियों को आपने कायर करार दिया वे आपको यही सम्बोधन देतीं | इतना ही नहीं मरुधरा के आँगन में कभी उतरेंगी तो धरती के उस हिस्से पर बसी आज की स्त्रियां भी आपको यूँ ही पुकारेंगी |
दूसरी बात यह कि मैं, अपनी अस्मिता और देह को क्षत-विक्षत होने से बचाने के लिए आग में कूद जाने वाली उन हजारों महिलाओं के समुदाय से तो नहीं हूँ, पर तपिश में भी कर्मठता को याद रखने वाली स्त्रियों की उसी धरती पर पली-बढ़ी हूँ |

तीसरी बात यह कि परिस्थितियों को जाने समझे बिना आपने जिनको कायर कह डाला उन्हीं स्त्रियों को दादी-परदादी और माँ से लेकर मेरी पीढ़ी तक की महिलाएं अपनी चुनरी का पल्ला पकड़कर प्रणाम करती हैं , क्यों ? यह आपको समझाना व्यर्थ है | आप समझ ही नहीं सकतीं |
स्वरा बाइसा, मुझ जैसी आम महिला ने कल आपके विचार सुने | अच्छा नहीं लगा | आज सुबह-सुबह देखा-सुना कि आपने अपने कहे की सफाई दे डाली है | मन में यह सवाल उठा कि आप कभी किसी दूसरे समुदाय को लेकर ऐसा क्यों नहीं कहतीं कि सफाई देनी पड़े | इतिहास तो सभी का है | भली-बुरी घटनाएँ भी सभी हिस्से रही हैं |
आप तो इस संवाद में जौहर करने के पीछे के कारण की चर्चा करना ही भूल गईं | नकारात्मक मानसिकता और वासना भरे मन वाले राक्षसों पर कुछ कहना नहीं सूझा आपको ? कुछ तो कहतीं उन आक्रांताओं के लिए जो उनकी आबरू छीनने पर ही उतारू नहीं थे सदा के लिए एक नरक में धकेलने की सोच से उनके आँगन में घुस आए थे |
हाल ही में देश की राजधानी में एक सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई है | बेहतर होता आप उसपर कुछ कहतीं | उस बेटी की मदद करने के लिए आगे आतीं | क्यों इतिहास के उन पन्नों को खोलकर दूसरों का मन दुखाती है, जिस दौर की हकीकत तक आपको नहीं पता | शुक्र है आपने यह नहीं कहा कि फुर्सत में थीं, सज-धजकर मन का शौक पूरा करने को ही आग में कूद गई होंगी
बड़ी-बड़ी बातें कहना आसान होता है बाई सा, आपने भी कह दीं, यूँ भी कहती ही रहती हैं | आप तो बीते कुछ समय से अपने बढ़ते वजन को लेकर की जा रही बॉडी शेमिंग को लेकर ही शिकायत करती दिखी हैं कई जगह | लोगों के इस बर्ताव का भी कोई महिला समर्थन नहीं करती| जौहर करने वालियों अपर केवल शब्दों की मार नहीं थी बाइसा …… फिर भी दुख है कि आपको उन राक्षसों, उन आक्रांताओं के झुंड से कोई शिकायत नहीं जो इन स्त्रियों की अस्मिता लूटने उनके ही सुंदर संसार में जा पहुंचे |
हाँ, उसी मिट्टी में पली बढ़ी हूँ….. मन बड़ा है और मेहनत की आदत | व्यावहारिक समझ और मानवीय समझ जीवन के पहले ही पड़ाव से हमारे साथ चलती है | तभी तो जीवन सहेजने वाले जल भरे बर्तन उसी धरा के हर मोड़ पर आज भी धरे मिलते हैं | हमने शुष्क हालातों में हरियाली उगाना सीखा है बाइसा …. अपना जीवन यूं ही भस्म करने वाली नहीं थीं हमारी पुरखिनें …..
हाँ, यह आपने सही कहा कि क्या रेप सरवाइवर को जीने का अधिकार नहीं ? सही कहा आपने दुष्कर्म पीड़ित स्त्री की क्या गलती ? दो शब्द इस पर भी कह देतीं बाइसा कि गलती उनकी है जो महिलाओं पर बुरी नजर रखते हैं | कुछ उन्हें भी सुना देतीं जो उस जमाने में भी इसी वासना की लार टपकाते अपनी दुर्दांत मानसिकता संग उन स्त्रियों घरों-महलों तक जा पहुंचे थे |
आप तो एक फिल्म के चंद सीन देखकर ही कह पड़ीं कि ‘आई फेल्ट लाइक ए वाजाइना” जीवन उस तीन घंटे की फिल्म जितना ही तो नहीं था ….. ? और यह बात वे स्त्रियाँ जानती होंगी ना !
हाँ, आपकी कही बातों में शामिल एक भाव यह भी था कि भगवान न करे मेरे साथ ऐसा कुछ हो ? वैसे तो इसपर भी बहुत कुछ कहा जा सकता है स्वरा बाइसा ….
फिलहाल इतना ही कि सचमुच ईश्वर न करे कि आप, इस देश या पूरे संसार की कोई भी स्त्री ऐसी परिस्थितियों में घिरे….अस्मिता पर आई आँच तो आत्मा को भस्म कर देती है, देह की सुध कहाँ बाइसा ….. ? आप सुरक्षित रहें |
मोनिका शर्मा की फेसबुक वाल से








