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By – mukesh kumar sinha & saurabh

मुकेश कुमार सिन्हा की प्रथम किताब हमिंग बर्ड ( कविता संग्रह ) खूब पढ़ी गई व चर्चा का विषय रही। कविता संग्रह के बाद लप्रेक लिखकर उन्होंने अपनी लेखनी का लोहा मनवा दिया। दोनों किताबें साहित्य जगत में अपना परचम लहरा रही हों तो ऐसे में उनके हृदय से प्रवाहित शब्द अंतस की आवाज को खुशी की धुन से अवश्य गुंजित करते हैं। लाल फ्राक वाली लड़की कहती है कि…….

Saurabh Dwivedi फेसबुक पर मिले, दिल से जीनेवाले बेहद मासूम और थोड़े अक्खड़ कवि हैं। जो तुलसीदास जी के जन्मस्थान चित्रकूट से संबंध रखते हैं। बुंदेलखंड के जमीनी राजनीति पर नजर रखने वाले कठोर पत्रकार होने के बावजूद इनके अंदर कवित्व की बेहद प्यारी सी सुर-ताल-लय बहती है। इनके शब्दों की मासूमियत कहीं अंदर को छूती है।

सौरभ कविताओं में चिंतन और भाव को प्राथमिकता देते हैं। साधारण शब्दों में गढ़ने के बावजूद सामाजिक चिंताओं के प्रति सजग रहना और भरसक संदेश देने की कोशिश में कविताओं को रचना, इनकी विशेषता कही जा सकती है।

गिटार, घोंसला, कोहिनूर, पाइथोगोरस प्रमेय, अखबार, वाइब्रेशन जैसे बिम्बों पर शब्दों को समेटना व कविता गढ़ना इनके कवि गुण के बारीकियों को दर्शाता है।

‘शेयर इट’ एप को प्रेम से पगी, मन की तासीर में बांध कर सौरभ ही मन की जुम्बिश में खो सकते हैं।

Sahitya Sanchay Prakashan से प्रकाशित “अंतस की आवाज” एक प्रेमिल कृति है, जिसे पढा जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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