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श्रमिकों का दावा है कि लक्ष्मीकांत न केवल एक चरित्रहीन अधिकारी हैं बल्कि वित्तीय और प्रशासनिक भ्रष्टाचार में भी लिप्त हैं।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। संस्थान के कर्मचारियों और श्रमिकों ने लक्ष्मीकांत और उनके करीबी वैज्ञानिक जय प्रकाश आदित्य पर अश्लील व्यवहार, महिला कर्मचारियों के साथ अभद्रता और संस्थान में प्रशासनिक तानाशाही का आरोप लगाते हुए कई पुख्ता साक्ष्य मीडिया के सामने रखे हैं।

मीडिया को भेजे गए दो वीडियो इस विवाद के केंद्र में हैं। पहले वीडियो में निदेशक लक्ष्मीकांत अपने साथी आदित्य का बचाव करते हुए उन्हें निर्दोष बता रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में आदित्य स्वयं महिलाओं से माफी मांगते हुए नजर आते हैं, वह भी पुलिस की उपस्थिति में।

हालांकि, मामला यहीं नहीं थमा। अब लक्ष्मीकांत खुद भी विवादों में घिरते दिखाई दे रहे हैं। कर्मचारियों ने उनके खिलाफ उस वक्त की घटना का खुलासा किया जब वे कार्यवाहक निदेशक के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने संस्थान के व्हाट्सएप ग्रुप में एक अश्लील वीडियो साझा किया, और जब इस पर आपत्ति दर्ज की गई तो उन्होंने ग्रुप को छोड़ दिया। बाद में माफी मांगते हुए दोबारा ग्रुप में शामिल हुए।

श्रमिकों द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में लक्ष्मीकांत की माफीनामा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसमें उन्होंने यह वीडियो गलती से भेजे जाने की बात लिखी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद से श्रमिकों पर उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ गई हैं। आरोप है कि प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर श्रमिकों को बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है। उत्तरकाशी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में फार्म मैनेजर सचिन पंवार द्वारा एक ड्राइवर को गोबर उठाने की ड्यूटी देने का मामला भी सामने आया है। जब श्रमिकों ने इसका लिखित आदेश मांगा तो उन्हें धमकाया गया।

श्रमिकों का दावा है कि लक्ष्मीकांत न केवल एक चरित्रहीन अधिकारी हैं बल्कि वित्तीय और प्रशासनिक भ्रष्टाचार में भी लिप्त हैं। उनके अनुसार कृषि भवन (नई दिल्ली) में लक्ष्मीकांत के खिलाफ कई शिकायतें लंबित हैं, लेकिन कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें संरक्षण दे रहे हैं।

मजदूर संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो वे उच्च अधिकारियों के भ्रष्टाचार का भी पर्दाफाश करेंगे। उन्होंने यह भी अपील की है कि यदि वीडियो की सत्यता को लेकर कोई संदेह हो, तो वे बिना ब्लर किए हुए स्क्रीनशॉट भी जांच एजेंसियों को भेजने को तैयार हैं।

यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत मर्यादा के हनन का नहीं, बल्कि एक संपूर्ण शासकीय संस्थान की साख पर लगे दाग का है। ऐसे में जरूरी है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) इस मामले को गंभीरता से ले और तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो लक्ष्मीकांत को ‘अनबिकमिंग ऑफिसर’ की श्रेणी में रखते हुए पद से हटाया जाए।

निष्कर्षत, यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि शासकीय पदों पर बैठे अधिकारियों के नैतिक और प्रशासनिक आचरण की पारदर्शी निगरानी आज भी कितनी जरूरी है।

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