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By :- Saurabh Dwivedi

गांव की आबादी गंदगी से बर्बादी की ओर गतिमान हो जाती है। बारिश के मौसम में गांव की गलियां गंदगी की तलैया बन जाती हैं। बजबजाती नालियां बीमारी की श्रापित झील बन जाती हैं। इन समस्त बिंदुओं के ध्यानार्थ समाजसेविका प्रधान दिव्या त्रिपाठी से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि चित्रकूट जनपद मुख्यालय ग्रामीण क्षेत्र का सबसे अधिक प्रतिनिधित्व करता है। निरोगी काया के लिए जितना योग जरूरी है उतनी साफ – सफाई की आवश्यकता है।

उन्होंने याद करते हुए कहा कि मेरे ग्राम सेमरिया जगन्नाथी में स्वच्छता का एक कदम बढ़ाया जा सका है। लगभग दो दर्जन से अधिक गोबर टैंक परिवारों को चिन्हित कर ग्राम समाज की जमीन पर बनाए गए। उन परिवार का कूड़ा – करकट और गोबर टैंक में डाला जाता है। आवश्यकता पड़ने पर यही गोबर खाद के रूप में खेतों पर प्रयोग में लाया जाता है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयास के अतिरिक्त स्वच्छता के प्रति ग्रामीण जनता को अभी भी अत्यधिक जागरूक करने की आवश्यकता है। गांव की जनता की चेतना स्वच्छता की ओर विकसित होगी तो स्वस्थ जीवन की परिकल्पना साकार होगी। इस दिशा में अभी अत्यधिक काम किया जाना जरूरी है। यह किसी एक गांव की समस्या नहीं बल्कि हर गांव में चुनौती दे रही है।

ग्रामीण जीवन के प्रति संवेदना से विचार किया जाए तो सचमुच यह बड़ा कष्टकारी जीवन है। गांव में रूमानियत लाने के लिए सड़क , बिजली और पानी के साथ जनता की सोच में विकास लाने की भी बहुत जरूरत है। चूंकि सबकुछ विचारों पर निर्भर होता है। अच्छे विचार से अच्छे मन का निर्माण होता है और संतुलित भाव का परिणाम होता है कि लोगों के चेहरे पर खुशी स्वयं झलकती है।

इसलिये सर्वप्रथम आवश्यकता है कि बीमारियों से बचने के लिए महिलाएं और पुरूष अपने गांव को स्वच्छ बनाने के लिए सभी को प्रेरित करें। जनप्रतिनिधि भी भरसक प्रयास जारी रख सकते हैं। किन्तु यह सामूहिक रूप से संभव होगा। सभी को एक साथ इस दिशा में खुशहाल जीवन के लिए काम करना चाहिए। स्वच्छता के विशेष प्रबंधों के साथ शहर , कस्बा और गांव के लोगों को विचारों के द्वारा पोषित करना चाहिए। यह संभव हो पाया तो यथाशीघ्र स्वच्छ , स्वस्थ , खुशहाल और समृद्ध जीवन की परिकल्पना साकार हो जाएगी।

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