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इसी पावन चित्रकूट वन में 21 दिसंबर से 29 दिसंबर तक एक तपस्वी संत द्वारा रामकथा का आयोजन किया जा रहा है। यह कथा केवल श्रवण नहीं, यह आत्मशुद्धि का अवसर है। 31 दिसंबर को विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें साधु-संतों, श्रद्धालुओं और वंचितों के लिए प्रसाद वितरण किया जाएगा।

चित्रकूट की धरती केवल वन नहीं, यह चेतना की प्रयोगशाला है। यहाँ हर कदम पर जीवन को दिशा देने वाले ऐसे अनुभव घटित होते हैं, जिनका उत्तर तर्क नहीं, केवल श्रद्धा देती है।

ऐसा ही एक अद्भुत प्रसंग हाल ही में सामने आया, जब एक श्रद्धालु जंगल स्थित सिद्ध तपस्वी संत महाराज के लिए प्रसाद लेकर कुटी पहुँचा। संत उस समय कुटी में उपस्थित नहीं थे, अतः प्रसाद आदरपूर्वक रखकर श्रद्धालु लौट आया।

पर वापसी के मार्ग में वही संत महाराज अचानक सामने मिल गए। जब उन्हें बताया गया कि कुटी में प्रसाद रख आया हूँ, तो संत महाराज सहज भाव से मुस्कुराए और बोले
“अच्छा… अच्छा… मैं देख रहा था।”

यह वाक्य केवल शब्द नहीं था, यह उस चेतना का संकेत था जो दृश्य-अदृश्य दोनों से परे होती है। न संत सामने थे, न कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य — फिर भी “मैं देख रहा था” सुनकर मन ठहर गया, चित्त नतमस्तक हो गया।

चित्रकूट का जंगल ऐसा ही है जहाँ चित्त को कूट-कूट कर जीवन का उत्तम मार्ग निकलता है। जहाँ लगन लग जाए, तो साधारण क्षण भी साधना बन जाते हैं।

यह अनुभव किसी राजनीतिक मंच का नहीं, किसी भाषण का नहीं यह एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। एक ऐसी यात्रा जो आत्मीय आनंद से भर देती है, जहाँ अविश्वसनीय और अकल्पनीय घटनाएँ प्रत्यक्ष अनुभव बनकर सामने आती हैं।

इसी पावन चित्रकूट वन में 21 दिसंबर से 29 दिसंबर तक एक तपस्वी संत द्वारा रामकथा का आयोजन किया जा रहा है। यह कथा केवल श्रवण नहीं, यह आत्मशुद्धि का अवसर है। 31 दिसंबर को विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें साधु-संतों, श्रद्धालुओं और वंचितों के लिए प्रसाद वितरण किया जाएगा।

इस आयोजन को आत्मनिर्भर और जन सहयोग से पूर्ण बनाने के लिए संत सेवा में दान का आवाहन किया गया है। यह दान कोई चंदा नहीं अपितु यह अपने जीवन के पुण्य खाते में किया गया निवेश है।

यह वही सेवा है, जिसका फल अदृश्य रूप से जीवन को दिशा देता है। जो भी श्रद्धालु इस संत सेवा से जुड़ेगा, वह केवल आयोजन का भागी नहीं बनेगा, बल्कि अपने भीतर एक नई यात्रा की शुरुआत करेगा।

आइए………..
दान को बोझ नहीं, सौभाग्य बनाइए। संत सेवा को अवसर समझिए। क्योंकि यहाँ दिया गया अन्न , आपके जीवन में प्रकाश बनकर लौटता है।

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