
एक दिन मैने कहा कि देखो कामतानाथ आज कितने खुश लग रहे हैं , फिर मुझे लगा कि कितने भावुक हैं और यह बात मैं विवेक से कह रहा था !
दर्शन करने गया था तो लगा कि जैसे मूरत बोल उठी है और उस दिन से मेरा कामतानाथ का रिश्ता बड़ा गहरा हो गया। मैं पढ़ने लगा भगवान के भाव !
मूर्ति मे आज क्या भाव उभर रहा है यह फील होने लगा। और बस अंतर्मन के रिश्ते की यात्रा चल पड़ी , मैने कामतानाथ भगवान के संदेश के कुछ वीडियो भी बनाए।
असल मे भगवान हैं क्या ? भाव हैं और भाव के सिवाय क्या ? सरल सी बोली मे बोलते हैं कि भगवान भाव के भूखे हैं तो मन मे जैसे भाव हैं वैसे भगवान हैं।

किन्तु कामतानाथ एक ऐसे भगवान हैं जो मन के विषाद को हर लेते हैं। अगर मन मे विषाद है , अवसाद है और विकार है तो कामदगिरि पर्वत के दर्शन भर से डिप्रेशन का द इंड हो जाता है। भगवान कामतानाथ कामनाओं को पूर्ण करते हैं और दुख दर्द को प्रसन्नता मे बदल देते हैं।
और लोगों को चाहिए क्या ? सब सुख की ओर यात्रा कर रहे हैं और सुख के लिए यात्रा कर रहे हैं , लक्ष्य सबका एक है और इस लक्ष्य की यात्रा मे अक्सर देह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेती है जैसे कि बचपन से युवा और युवा से थोड़ी ज्यादा उम्र होगी फिर एक दिन बुढ़ापा आ जाएगा मगर किसी को अगर कुछ नही मिलता तो वह है सुख का लक्ष्य मतलब सुख नही मिलता !
जीवन ऐसे बीतता चला जाता है और देह मुक्तिधाम पहुंच जाती है इस दौरान दुख से मुक्ति की उम्मीद मे सरकारें बदलती हैं और बहुत कुछ घर परिवार और समाज मे बदल जाता है परंतु देह से मुक्त होने से पहले दुख से कहाँ मुक्त हो पाते हैं।

इसलिए मुक्तिधाम मे जाने से पहले चित्रकूट स्थित कामतानाथ भगवान के दर्शन जरूर कर लेना क्योंकि साक्षात प्रकृति यहाँ चमत्कार करती है इसलिए हर अमावस्या मे लाखों की भीड लगती है तो कामदगिरि पर्वत स्वयं पर्यावरण के महत्व का दर्शन देते हैं और विषाद मुक्त कर चरितार्थ करते हैं कि
” कामद भये गिरि राम प्रसादा ।
अवलोकत अपहरत विषादा ।। “
अर्थात जिनके अवलोकन से विषाद नष्ट हो जाता है , ऐसे राम जी के प्रसाद हैं कामदगिरि भगवान।
आज मैं इतना लिख पाया और कह पाया तो यह भगवान कामतानाथ की शक्ति की कृपा है अन्यथा यह वर्णन नही किया जा सकता था क्योंकि ” अनाथों के नाथ कामतानाथ भगवान हैं।” तो मेरे नाथ हैं और यह भाव से प्रमाणित है।
यह पढ़कर दर्शन करने का मन किया हो तो ब्रह्मपुरी चित्रकूट धाम मे आपका स्वागत है।








