
चित्रकूट जंगल मे मिला देवराहा बाबा का आश्रम जहाँ है चुंबकीय ऊर्जा
चित्रकूट जंगल |
पहले गहरी श्वांस भर लीजिए फिर इस खोज भरे लेख को अंत तक पढ़ लीजिए , हर मनुष्य जिंदगी भर क्या चाहता है ? हर औरत जीवन मे क्या चाहती है ? जवाब है सुख !
सुख का सीधा सरल रिश्ता ऊर्जा से है। अगर ऐसी ऊर्जा मिल जाए जो आनंद दे , उत्साह से भर दे , जहाँ सुकून महसूस हो तो वहाँ से निकलने का मन नही करेगा। अपितु मन कहेगा यहाँ कुछ देर और बिता लेते हैं।
वैसे तो इस आश्रम को डिस्क्लोज करने से पहले डर लग रहा है कि यहाँ भी वही कोलाहल ना हो जाए तो बहुत कम लोग जानें और यहाँ साधक ही आएं। जो लोग जीवन को सुखमय आनंदमय शांतिमय महसूस करना चाहते हैं , उन सभी का स्वागत है। मगर यहाँ भीड़ नही होनी चाहिए बल्कि एक और एक से अधिक अधिकतम दो की संख्या मे आएं।

यहाँ विशाल वट वृक्ष है जो सनातन वृक्ष कहा जा सकता है क्योंकि इसकी उम्र का कोई अंदाज नही है , वट वृक्ष मतलब संजीवनी वृक्ष क्योंकि जो खुद एक ओर मृत होता रहता है और दूसरी ओर नया जीवन धारण करता रहता है जैसा मनुष्य कभी नही कर सकता तो चित्रकूट जंगल मे देवराहा बाबा मचान आश्रम मे वट वृक्ष की ऊर्जा का भी अहसास होता है।
संभवतः यह लेख बहुत कम लोगों तक पहुंचेगा किन्तु जो भी इस लेख को पढ़ रहा है वह भाग्यशाली है , मान के चलते हैं कि ब्रह्मांड की विशेष कृपा है। क्योंकि ऊर्जावान लेख पढ़ना भी लोगों को अंदर से ऊर्जावान कर देता है। इसलिए पढ़ते ही महसूस करिए ईश्वर मेरी तरह आपके साथ भी अच्छा करना चाहते हैं क्योंकि मैं अचानक से भटक कर देवराहा बाबा आश्रम पहुंचा था।
एक वर्ष पूर्व पंच प्रयाग चित्रकूट पहुंचने पर बाबा की मचान के दर्शन नही हुए थे। उस समय मैं और मेरा सहमार्गी विवेक पहले रास्ते से पहुंचे थे और इस बार अचानक से दूसरे रास्ते मे चल पड़े थे कि नही इससे नही गए थे बल्कि इसी रास्ते से गए थे और फिर सीधा श्री देवराहा बाबा मचान मंदिर आश्रम मे पहुंच गए थे तो होठ खिल गए और हम आश्चर्यचकित हो चुके थे।
जूते – मोजे उतारकर रखे तो उस भूमि मे नंगे कदम पड़ते ही चुंबकीय ऊर्जा का अहसास हुआ बस फिर उस पल से प्राण जाग उठे और आश्रम हर पल महसूस होने लगा। अब वहाँ संत सेवा करने लगा और कुछ समय व्यतीत करने लगा।
हाँ ; ऐसा सिर्फ इसलिए लिखा कि जीवन को सुधारने की सोच रखने वालों को अवसर मिल सके और मैं संत सेवा मार्ग से आश्रम मे कुछ विशेष कर सकूं।
कुलमिलाकर श्री देवराहा बाबा का आशीर्वाद मिला और देवराहा बाबा आश्रम से परिचय नीम करोली बाबा की प्रेरणा से हुआ ; यह भी एक सच्ची गाथा है जो कभी शब्दों मे लिखकर गाऊंगा। अंत मे सिर्फ इतना ही कहना है कि चित्रकूट सनातन धर्म नगरी है जहाँ आज भी सिद्ध संतों के दर्शन होते हैं जहाँ आज भी ऋषि मुनि तपस्या कर रहे हैं।








