
शिक्षक – शिक्षा , संस्कार और घोटाला फिर भी दल कह रहा है स्वदेशी अपनाओ लेकिन स्वदेशी मे क्या ? कोषागार घोटाले मे सरकार और समाज का वह वर्ग बड़ा दोषी सिद्ध हुआ है जो पीढ़ियों का प्रहरी है ! जिसके ऊपर किताबी ज्ञान नही संस्कार देने की भी जिम्मेदारी है।
जिस प्रकार से सामाजिक पतन हो चुका है , उससे गंभीर विषयों पर लिखने का मन नही करता फिर भी मन नही मानता तो सोचा क्यों ना याद दिलाऊं कि आत्मनिर्भर भारत मे विकसित उत्तर प्रदेश मे शिक्षक का क्या पैमाना है ?
जब शिक्षक भ्रष्टाचार मे लिप्त पाया जाए तो क्या पूरे समाज को सर झुकाकर नही खड़ा हो जाना चाहिए ? बड़े से बड़े नेता को चौराहे मे आकर समाज से माफी मांगनी चाहिए और कहना चाहिए कि हम असफल रहे।
ऐसे मामले पे बिहार चुनाव से ज्यादा जरूरी है कि सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान आ जाना चाहिए कि अरे जिस सरकार और समाज का शिक्षक भ्रष्टाचार मे संलिप्त हो गया अब उस समाज की नींव ही हिल गई , खोखली इमारत खड़ी रहने से क्या फायदा है ?

कोषागार घोटाला चित्रकूट का सबसे खास दृष्टिकोण यही है लेकिन इसको गिरफ्तारी दिखाकर , रकम वापसी दिखाकर हर साल रावण को जलाकर यह बताने जैसा है कि हम बुराई का वध कर दिए मगर कोई ये क्यों नही बताता कि तुम्हारे तो शिक्षकों के अंदर ही अहिरावण जिंदा है।
आप उन स्कूलों मे अपने बच्चों को पढ़ने भेज रहे हैं जो शिक्षक चोरी मे संलिप्त पाया गया और आज की पीढ़ी से तो पिछली पीढ़ी अच्छी कही जा रही थी तो फिर आखिर बुज़ुर्ग पेंशनधारकों को ऐसी वाहियात रकम की जरूरत क्यों पड़ी ? जिस उम्र मे वानप्रस्थ का समय आ जाता है , शास्त्र कहते हैं कि कुछ नही तो 60 की उम्र से वन की ओर चले जाओ अर्थात सभी प्रकार के लोभ मोह से ऊपर हो जाओ और भगवान का चिंतन मनन भजन करो लेकिन देखिए कलियुग मे 75 की उम्र तय हुई कि मार्गदर्शक मंडल मे जाएंगे अर्थात जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे।
मैं लगातार इसी पीड़ा मे था कि क्या लिखा जाए 100 करोड़ या 43 करोड़ लिखा जाए या फिर शर्मसार हुआ जाए कि ऋषि बाल्मिकी की भूमि , संत तुलसीदास की भूमि और वनवासी श्रीराम की भूमि में भू माफिया सक्रिय हैं और शिक्षक मनी लांड्रिंग का शिकार हो गया , मैं अपनी कलम अपनी ऊर्जा को बर्बाद नही होने देना चाहता इसलिए तमाम नाली खडंजा और भवन निर्माण मे होने वाले भ्रष्टाचार पर नही लिखता क्योंकि पूरा ब्लाक खा जाओ तो भी जांच नही होगी और कोई धर पकड़ नही होगी , अरे यह पैसा तो कोषागार का है मतलब सरकार के घर चोरी हो गई तो सरकार कोष बराबर करने की वसूली कर रही !
अंततः सिर्फ इतना ही कि चिंतन कर लो कि अब भी विश्व गुरू बनेगा भारत जहाँ गुरू घंटाल निकल गए हों ? बहुत दुखद है भारत आत्मनिर्भर नही भारत आत्महत्या कर रहा है।








