
“मैं आपसे कहता हूँ – सेक्स पाप नहीं है। सेक्स ईश्वर की सबसे बड़ी ऊर्जा है। जैसे नदी बहती है, वैसे ही यह ऊर्जा भी बहती है। नदी का गलत इस्तेमाल न करें, नदी को समझें। अगर आप नदी को समझ लेते हैं, तो उसी नदी से बिजली पैदा कर सकते हैं, उसी नदी से अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं।”
“और अगर आप नदी का गलत इस्तेमाल करते हैं, उसे रोकते हैं, तो बाढ़ आएगी, गाँव डूब जाएँगे। आज भारत में भी वही बाढ़ आ रही है – हर तरफ वासना, हर तरफ अपराध – क्योंकि हमने उस ऊर्जा को रोक दिया है।”

“सेक्स से समाधि तक का मतलब है – इस ऊर्जा को रोकें नहीं, इस ऊर्जा को जानें, इस ऊर्जा को ध्यान में बदलें। जिस दिन आप सेक्स में भी ध्यान करेंगे, उसी दिन सेक्स समाधि बन जाएगा।”
“याद रखें – जो चीज़ आपको नीचे गिरा सकती है, वही आपको ऊपर भी उठा सकती है। तलवार किसी की जान ले भी सकती है और किसी की जान बचा भी सकती है। सेक्स एक तलवार है – इसे समझें।”
ओशो – विज्ञान भैरव तंत्र








