
एक शाम को एसपी साहब शांति व्यवस्था की परेड पर निकले थे ; ठीक उसी समय एक शराब पिए व्यक्ति ने कहा ” अबे साले पुलिस। ” उस पल की यह सबसे बड़ी घटना थी।
पुलिस को कोई बोले कि अबे साले पुलिस तो कंधे मे टंगे स्टार को चोट तो लगेगी और ऐसा ही हुआ था। एसपी साहब शराबी को आग बबूला हुए और सिंघम स्टाइल मे बोले थे कि ” ले जाओ साले को। “
हाल फिलहाल चित्रकूट जनपद मे बाबा भरत दास सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सहित महिलाओं का चरित्र हनन करता हुआ पाया गया जिसमे पूर्व सांसद भैरोंप्रसाद मिश्र की माँ को लेकर भी अभद्र टिप्पणी की गई मगर कानून का वह तेवर नही दिखा जिस तेवर से एक शराबी को बोला गया कि ” ले जाओ साले को। “

गुरुनानक देव की एक कहानी थी कि वे एक दिन भ्रमण मे निकले थे तो एक गांव मे उनको बहुत बुरा भला बोला गया , उन्होंने सुना और गांव के बाहर निकलते ही बोले कि हे ईश्वर इस गांव के लोग सुख समृद्धि से इसी गांव मे रहें।
तत्पश्चात वह दूसरे गांव पहुंचे जहाँ खूब सत्संग हुआ ; गुरुनानक देव को बहुत सम्मान मिला। लेकिन जब वह गांव के बाहर निकले तो बोले कि इस गांव के लोग दूर दूर तक फैल जाएं !
उनके शिष्य आश्चर्यचकित होकर प्रश्न करते हैं कि जिस गांव के लोग बुरे थे उनको आपने आशीर्वाद दिया कि ये लोग इसी गांव के अंदर ही सुख समृद्धि से रहें लेकिन जो लोग अच्छे हैं उनको आप बोल रहे हो कि ये दूर दूर तक फैल जाएं ? यह कितना विचित्र है कि हमारे समझ मे नही आ रहा !
गुरुनानक देव ने जवाब दिया कि बुराई का अंत सीमित जगह पर हो जाए वह सीमित जगह पर रहे इसलिए बुरे लोगों को गांव मे ही रह जाने का आशीर्वाद दिया और अच्छे लोगों का विस्तार होगा तो अच्छाई का विस्तार होगा , उनके शिष्य जवाब पाकर सुखद महसूस किए।
अब चित्रकूट मे एक शराबी सलाखों के पीछे ले जाया जाता है लेकिन महीने भर से ज्यादा होने जा रहे हैं और वही पुलिस नियंत्रण नही कर पा रही है , वही कानून वही साहब और कार्रवाई का अंतर कितना बड़ा है ?
अब समाज के जिम्मेदार लोगों को समझना चाहिए कि संविधान की वह धारा जो कहती है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को सम्मान सहित जीवन जीने का अधिकार है तो क्या कानून ऐसा कर पा रहा है ?








