
भाग्य जनता तय करती है तो हक जनता को होना चाहिए कि पंचायत प्रतिनिधि का कार्यकाल बढ़ेगा या नही ! किन्तु वह किंकर्तव्यविमूढ है , वोट डालने के बाद वही जनता विधवा हो जाती है जिसे कोई निर्णय लेने का हक नही रह जाता।
हाल ही मे प्रदेश के उप मुख्यमंत्री से कुछ प्रधानों ने मुलाकात की जिनके साथ भाजपा नेता शिवपूजन गुप्ता भी नजर आए , सूत्रों की माने तो प्रधान शिवपूजन गुप्ता के साथ डिप्टी सीएम के पास तक पहुंच सके।

मुलाकात मे प्रधानों ने मांग की है कि कार्यकाल बढ़ा दिया जाए क्योंकि समय पर चुनाव नही हो पा रहे तो प्रशासन के अधिकार क्षेत्र मे सबकुछ ना सौंप कर प्रधान के अधिकार क्षेत्र मे रहे , वजह विकास कार्य मे बाधा और गोशाला मे गाय की सेवा बताया जा रहा है।
इससे पहले अपना दल के विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी से भी प्रधान संघ ने मुलाकात कर ऐसी मांग रखी थी जिसके बाद तीखी आलोचना का सामना भी प्रधानों को करना पड़ा था कि ” जो लोग 5 साल तक रोते रहे कि प्रधानी मे कुछ नही है आज वही लोग ऐसी मांग कर रहे हैं कि जब कुछ नही है तो पद मे क्यों बने रहना चाहते हैं। “
दूध का दूध पानी का पानी हो गया है कि कुछ तो है जिससे पद मे बने रहने का हठयोग प्रधानों के द्वारा किया जा रहा है ; मगर इस खेल के बड़े खिलाड़ी प्रमुख क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत हैं जो गप्प मारकर मौन साधकर बैठे हैं कि इनका कार्यकाल बढ़ेगा तो हमारा बढ़ ही जाना है , कहने को शेष क्या रह जाता है ?
हो सकता है कि सरकार भी यही चाहती है कि हमारे पास कागज के घोड़े आएं जिनको विधानसभा की घुड़साल मे बाँधकर दिखा सकें कि इतनी मांग हुई जिससे जनहित मे विकास कार्यों के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि विधेयक पेश कर पंचायत का कार्यकाल आगामी विधानसभा चुनाव तक बढ़ाया जा रहा है जो अगली सरकार बनने के बाद संपन्न कराए जाएंगे और इसके बहुत फायदे हैं जिनका विश्लेषण समय के साथ किया जाएगा।
कुलमिलाकर जनता की अदालत मे गांव की सरकार का निर्णय होना चाहिए था जो अब भी होगा विकास की हकीकत पंचायत से विधानसभा तक दिखेगी बेशक वह मीडिया रिपोर्ट्स मे दिखे , क्योंकि अंततः जनता मीडिया की और मीडिया जनता की हृदय और धड़कन जैसे हैं।








