
चित्रकूट | उत्तर प्रदेश
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर सोमवार को विधान परिषद सदस्य जितेन्द्र सिंह सेंगर चित्रकूट आए जहाँ जिला पंचायत सभागार मे भाजपाईयों ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान मे यादगार श्रद्धाँजलि अर्पित की !
जिला पंचायत सभागार से डाक बंगला तक तस्वीर बदल चुकी थी। डाक बंगला मे जितेन्द्र सिंह सेंगर कार्यकर्ताओं से मुलाकात एवं जलपान के लिए आए थे।

वहाँ चाय – पानी होते होते ही दो दारोगा को फोन लगाना पड़ा और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश देने पड़े कि पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए साथ ही किसी को इरादतन सताने की सूचना नही मिलनी चाहिए।
उनके शब्द इतने स्पष्ट और प्रभावी थे कि बूथ तक का कार्यकर्ता सुनकर खुश हो गया तो वजह यही थी कि कमरे से बाहर कार मे बैठने तक कार्यकर्ता उनको घेरकर खड़े नजर आए और घंटो बात करते रहे।
उन्होंने सबकी सुनी और संबंधित अधिकारियों को सुनाई , जिससे कार्यकर्ता यह कहते हुए सुनाई दिए कि आज इस तरह कहने वाला विधायक हमको मिला है तो विधान परिषद सदस्य जितेन्द्र सिंह सेंगर बोल पड़े कि मैं कार्यकर्ता के कोटे का विधायक हूँ।
इस तरह के वार्तालाप ने कार्यकर्ता व विधान परिषद सदस्य के बीच के गुड रिलेशनशिप को स्पष्ट बयां किया है। कार्यकर्ताओं ने जब कहा कि आज हमारी पीड़ा को सुनने वाला कोई मिला है तो चित्रकूट का अनकहा सा दर्द समेटकर रह गए जितेन्द्र सिंह सेंगर और यह वादा कर गए कि मुझे काॅल करना मै ही फोन उठाऊंगा और बराबर बात करूँगा , मैं जनता का काम करने के लिए हूँ और सबका काम करूंगा।
तो यह मुख्य वजहें हैं जिससे चित्रकूट में दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता विधान परिषद सदस्य जितेन्द्र सिंह सेंगर को घेर लिए थे और उस घेरे में फंसकर सबकी सुनते रहे , तो इस तरह घिरा देखकर आप लोग अर्थात आम जनता का फीड बैक भी मिल रहा है लोग सोशल मीडिया मे अपनी अपनी बात कह रहे हैं।
इसलिए कहा कि कार्यकर्ता बाद मे हैं पहले हर व्यक्ति जनता है तो आम जनता की सुनवाई में अफसर अगर कोताही करते हैं तो जनप्रतिनिधि की भूमिका मुख्य हो जाती है और इसलिए चित्रकूट मे लोगों ने घेर लिया था। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष महेन्द्र कोटार्य भी मौजूद रहे।
सीएम योगी आदित्यनाथ को पैनी नजर और कठोर कार्रवाई की मिशाल अफसरशाही मे पेश करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है जो जन इनपुट मिल रहे हैं उससे तो कम से कम यही लगता है कि शासन- प्रशासन स्तर पर लोक व्यवहार के मामले मे बहुत व्यापक बदलाव होने चाहिए।
卐 लेखक पत्रकार सौरभ स्वतंत्र द्विवेदी की कलम से 卐








