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फर्क साफ है जिस प्रदेश मे सैफई महोत्सव हुआ करता था वहाँ अब अयोध्या महोत्सव होता है , सांस्कृतिक आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से बदलते उत्तर प्रदेश मे सपा की गुंजाइश कितनी है ? पहले अपने परिवार की सीटें बचा लें अखिलेश यादव यही बड़ी सफलता होगी चूंकि भाजपा का दावा उनकी परिवार की सीट जीतने का है।

बीजेपी की हुंकार को ललकारते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सपा यूपी की अस्सी की अस्सी सीटें जीतेगी , यह भाजपा की खींची हुई लकीर पर चलने का प्रयास है लेकिन अंतर भाजपा और सपा का कितना बड़ा हो चुका है शायद इसका भान अखिलेश यादव को नही है।

फर्क साफ है जिस प्रदेश मे सैफई महोत्सव हुआ करता था वहाँ अब अयोध्या महोत्सव होता है , सांस्कृतिक आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से बदलते उत्तर प्रदेश मे सपा की गुंजाइश कितनी है ? पहले अपने परिवार की सीटें बचा लें अखिलेश यादव यही बड़ी सफलता होगी चूंकि भाजपा का दावा उनकी परिवार की सीट जीतने का है।

सपा पहले प्रदेश की जनता को जवाब दे कि गुण्डाराज को जन्म क्यों दिया था ? जिसे अब तक भाजपा सरकार खत्म करने मे कानूनी ताकत झोक रखी है। अतीक जैसे माफिया नेता का खात्मा सड़क पर हुआ तो सोचिए जनता कितना परेशान थी कि वह प्रसन्न हुई कि बदमाशों का खात्मा बदमाश कर रहे हैं।

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लोग नही भूलते कि अतीक के कुत्ते से तब के मुख्यमंत्री हाथ मिलाया करते थे। लेकिन अब के मुख्यमंत्री बदमाश , गुंडे और माफियाओं का खात्मा पागल कुत्तों की तरह करने मे विश्वास रखते हैं और कानून को काम करने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।

अब विकास की हर सीढ़ी चढ़ता उत्तर प्रदेश नजर आ रहा है जहाँ इनवेस्टर समिट के जरिए लाखों करोड़ का निवेश हो रहा है और व्यापार की दृष्टि से माहौल बनता नजर आ रहा है इसके पहले सपा के शासनकाल मे भय का माहौल था और व्यापरियों से रंगदारी वसूली जाती थी , फर्क साफ है।

और अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एक महंत है जिन्होंने सेवा करने के लिए नब्बे के दशक मे सन्यास ले लिया था। मोह से मुक्त महंत योगी आदित्यनाथ सख्त निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद जहाँ राष्ट्रीय स्तर का है और उनकी अपनी एक वैश्विक पहचान है तो वहीं अखिलेश यादव का कद एक प्रदेश और एक जाति तक सीमित होता नजर आ रहा है या फिर अधिक से अधिक धर्म विशेष के तुष्टीकरण का चेहर बनते नजर आए हैं यह अलग बात है कि वह अब मंदिर मंदिर फोटो खिचाकर ट्विट करते नजर आते हैं परंतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे महान व्यक्तित्व के सामने अखिलेश यादव का कद बौना साबित हो रहा है।

इसलिए उत्तर प्रदेश मे भाजपा अस्सी की अस्सी सीटें जीतकर इतिहास रचेगी और 2024 के चुनाव के बाद अखिलेश यादव को समझ आएगा कि वह अपनी व अपने परिवार की सीट नही बचा पाए जो परिवारवाद पर अंतिम कील ठोकने जैसा होगा।

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