SHARE
अजय गुप्ता ने अपने बयान में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का भी व्यापक उपयोग किया। उन्होंने कहा कि चित्रकूट की “रज में पवित्रता और विजय का आशीर्वाद” है तथा 24 मई को चित्रकूट में एलजेपी का एक बड़ा “मंथन” आयोजित किया जाएगा।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए संकेत उभरते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय गुप्ता के हालिया बयान ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में एलजेपी की रणनीति को भी स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

अजय गुप्ता ने दावा किया कि एलजेपी अब उत्तर प्रदेश में “सुपरफास्ट स्पीड” से संगठन विस्तार में जुट चुकी है। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं बल्कि युवा ऊर्जा और नई राजनीतिक संभावना के प्रतीक हैं। उन्होंने प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि “जैसे एक छोटा सा दीपक अंधकार में सबसे बड़ा प्रकाश बनता है, वैसे ही चिराग पासवान भविष्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने वाले नेता हैं।”

राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की हो रही है जिसमें चिराग पासवान को “मोदी के हनुमान” की उपाधि से जोड़ते हुए बड़ा संकेत देने की कोशिश की गई थी। भारतीय राजनीति में “हनुमान” शब्द निष्ठा, समर्पण और संघर्षशील सहयोगी के रूप में देखा जाता है। ऐसे में यह बयान भाजपा और एलजेपी के रिश्तों को लेकर नए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में एलजेपी का विस्तार आसान नहीं है, क्योंकि यहां पहले से भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस जैसी मजबूत ताकतें मौजूद हैं। लेकिन दलित, युवा और पूर्वांचल-बुंदेलखंड क्षेत्र में यदि एलजेपी अपनी अलग पहचान बना पाती है तो वह भविष्य में गठबंधन राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

अजय गुप्ता ने अपने बयान में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का भी व्यापक उपयोग किया। उन्होंने कहा कि चित्रकूट की “रज में पवित्रता और विजय का आशीर्वाद” है तथा 24 मई को चित्रकूट में एलजेपी का एक बड़ा “मंथन” आयोजित किया जाएगा। उन्होंने रामायण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि “जैसे रावण वध से पहले भगवान श्रीराम ने चित्रकूट से शक्ति प्राप्त की थी, वैसे ही एलजेपी का देशव्यापी अभियान भी यहां से नई ऊर्जा लेकर आगे बढ़ेगा।”

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक भावनाओं के सहारे संगठन विस्तार की यह रणनीति उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई नहीं है, लेकिन एलजेपी द्वारा इसे अपनाना यह दर्शाता है कि पार्टी खुद को केवल बिहार तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी अब राष्ट्रीय विस्तार के एजेंडे पर काम करती दिखाई दे रही है।

एलजेपी नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं को दिया गया यह संदेश भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि “जन-जन का जीवन सुखमय बनाने” के लिए संगठन को मजबूत करना होगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी सामाजिक सरोकार, युवा नेतृत्व और वैचारिक विस्तार को एक साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि उत्तर प्रदेश में एलजेपी का यह अभियान वास्तविक जनाधार में कितना बदल पाता है। फिलहाल इतना जरूर है कि चिराग पासवान को केंद्र में रखकर पार्टी ने यूपी की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास तेज कर दिया है।

image_printPrint
5.00 avg. rating (99% score) - 2 votes